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अब सूचना का अधिकार से नहीं हो पाएगी ब्लैकमेलिंग

Tue, 25 Apr 2017 11:51 AM IST
भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, देहरादून
भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 25 Apr 2017 11:51 AM IST
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no more blackmailing through rit
- फोटो : demo pic

उत्तराखंड में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत गलत नीयत और ब्लैकमेलिंग के उद्देश्य से बार-बार एक ही अपील दायर करने वालों को राज्य सूचना आयोग चिह्नित करेगा।

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ऐसी अपीलों की सुनवाई करने से भी आयोग ने दरवाजे बंद कर दिए हैं। राज्य सूचना आयोग का तर्क है कि शिकायतकर्ता एक ही मसले पर बार-बार अपील दायर कर संबंधित विभागीय अधिकारियों और सरकार पर काम का बोझ बना रहे हैं। आयोग के संज्ञान में वन विभाग से संबंधित आरटीआई का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसकी सुनवाई करने से आयोग ने मना कर दिया।
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आरटीआई अधिनियम को हथियार बनाकर अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए कुछ शिकायतकर्ता एक ही मुद्दे पर बार-बार अपील दायर कर रहे हैं। राज्य सूचना आयोग के पास भी वन विभाग से संबंधित आरटीआई का एक ऐसा केस आया है। जिसमें शिकायतकर्ता ने एक ही मुद्दे पर कई बार अपील दायर की है। आयोग ने इस अपील की सुनवाई करने से मना कर दिया। साथ ही इस प्रकार के केसों को चिह्नित कर आयोग ने सुनवाई के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं।
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आयोग ने आरटीआई के लंबित मामलों का समय पर निपटारा करने को भी गंभीरता से लिया है। जिसमें किसी प्रकार की सूचना के लिए आवेदन से लेकर नोटिस जारी करने और सुनवाई की प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर निपटारा किया जाएगा। यानी एक माह में 300 मामलों का निस्तारण किया जाए। आयोग का मामला है कि तीन महीने में लंबित मामलों की संख्या 900 तक रहनी चाहिए। जबकि वर्तमान में लंबित केसों की संख्या 1500 के करीब है। लंबित केसों की संख्या कम करने के लिए आयोग की तरफ  से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि आयोग के पास अपील के लिए छन कर केस आए और लोगों को भी आयोग के चक्कर न काटना पड़े।


गलत नियत से दायर अपील की सुनवाई नहीं करेगा आयोग
मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघन सिंह ने बताया कि बिना लोकहित से जुड़े मसले पर अधिकारियों पर दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने वाले कार्यकर्ताओं चिह्नित किया जाएगा। साथ ही इस प्रकार की अपीलों की आयोग सुनवाई नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग के पास भी एक ही मामले में बार-बार अपील दर्ज करवाई जा रही है। जिससे संबंधित विभागों और सरकार पर भी अतिरिक्त काम का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों को निपटाने के लिए आयोग गंभीर है। आयोग का प्रयास है कि किसी भी मामले का तीन महीने के भीतर निपटारा किया जाए।

आयोग के पास मार्च 2017 तक अपीलों और शिकायतों का ब्योरा
अपील         निस्तारित        लंबित मामले
23362        21775        1587

शिकायतें               निस्तारित        लंबित मामले
11969        11733        236

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