फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   no humanity shown by nari niketan in the samwasini funeral.

संवासिनी के अंतिम संस्कार में मानवता हुई शर्मसार

Sat, 26 Dec 2015 03:11 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 26 Dec 2015 03:11 PM IST
विज्ञापन
no humanity shown by nari niketan in the samwasini funeral.

इतनी बदनामी के बाद भी नारी निकेतन तंत्र कोई सबक लेता नहीं दिख रहा है। शनिवार संवासिनी शिवानी गुप्ता के अंतिम संस्कार में भी वह लापरवाह बना रहा। शव के साथ केवल कागज का टुकड़ा लेकर पहुंचे कर्मचारियों को पहले तो पंडित ने क्रिया कर्म कराने से मना कर दिया। जैसे-तैसे पंडित तैयार हुए तो कर्मचारी बजट नहीं होने का रोना रोने लगे।

विज्ञापन


शमशान घाट समिति ने इंसानियत दिखाते हुए कुछ सामान और सामग्री उपलब्ध कराई तब जाकर संवासिनी का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान समाज कल्याण और प्रशासन का एक भी जिम्ममेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
विज्ञापन


पोस्टमार्टम के बाद संवासिनी शिवानी गुप्ता के पार्थिव शरीर को लक्खीबाग स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। एंबुलेंस में शव लेकर आए दो कर्मचारी न तो संवासिनी के मृत्यु का प्रमाण पत्र और न ही किसी तरह का सरकारी दस्तावेज लेकर आए थे। सिर्फ सफेद कागज के टुकड़े पर संवासिनी की मौत का उल्लेख किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

अंतिम संस्कार के खर्च का रोना रोते रहे कर्मचारी

no humanity shown by nari niketan in the samwasini funeral.

शमशान घाट के पंडित अनिल शर्मा ने डेथ सर्टिफिकेट अथवा नारी निकेतन के दस्तावेज के बिना अंतिम संस्कार कराने से इनकार कर दिया। इस वजह से करीब बीस मिनट तक ऊहापोह की स्थिति रही। इसी बीच शव लेकर आए एंबुलेंस के चालक ने पंडित से बातचीत की। परिचित होने के कारण चालक ने पूरी जिम्मेदारी ली तो पंडित ने अंतिम संस्कार पर हामी भरी।

इसके बाद अंतिम संस्कार के खर्च की बात आई तो कर्मचारी सरकारी स्तर पर धन नहीं मिलने का रोना-रोने लगे। उन्होंने कहा कि उन्हें ही मिल-जुलकर रकम खर्च करनी है।

इसके बाद श्मशान घाट समिति ने कुछ सामग्री और सामान अपनी तरफ से दिया। इसके बाद धार्मिक रीति रिवाज से संवासिनी का अंतिम संस्कार किया गया। नारी निकेतन के कर्मचारियों से सिर्फ 1500 रुपये लिया गया।

साल 2007 में आई थी नारी निकेतन
संवासिनी शिवानी गुप्ता साल 2007 में कोतवाली क्षेत्र में लावारिस अवस्था में मिली थी। मानसिक रूप से बीमार होने की वजह से वह अपने बारे में कुछ नहीं बता पाई थी। सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर उसे नारी निकेतन भेज दिया गया था। उपचार के लिए संवासिनी को बरेली भी भेजा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed