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उत्तराखंड के टैक्सी बिल घोटाले की सीबीसीआईडी जांच नहीं
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:50 AM IST
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- फोटो : demo pic
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स्वास्थ्य विभाग के टैक्सी बिल घोटाले की जांच सीबीसीआईडी को नहीं दी जाएगी। गृह विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के सीबीसीआईडी जांच के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है।
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गृह विभाग के प्रस्ताव लौटा देने के बाद अब विभागीय स्तर से ही इस मामले में कार्रवाई होगी। इस प्रकरण के सभी आरोपी डाक्टरों ने आरोप पत्रों का जवाब दे दिया है, लेकिन महानिदेशालय की ओर से अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के पास सिर्फ एक डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई के लिए फाइल भेजी गई है।
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मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रमों में इस्तेमाल किए गए वाहनों के पेट्रोल-डीजल के बिल का पैसा बिना प्रावधान के स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न मदों से दिया गया था। यह घोटाला उजागर होने के बाद देहरादून, टिहरी, ऊधमसिंहनगर समेत कई जिलों के सीएमओ और जिला अस्पतालों के अधीक्षकों को दोषी पाया गया। इस पर सभी आरोपी डाक्टरों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया। डॉक्टरों ने शासन को आरोप पत्र का जवाब दे दिया है।
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इसके बाद मामले की विस्तृत जांच सीबीसीआईडी से कराने के संबंध में गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा गया। गृह विभाग ने मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। मामले में 12 डाक्टर आरोपी रहे हैं। इनमें दो की मृत्यु हो चुकी है। बाकी बचे आरोपियों में अभी सिर्फ एक डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में अपर मुख्य सचिव को फाइल भेजी गई है। बता दें कि इस मामले में एनएचएम के राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक डा. आरएस असवाल का नाम भी है। इसी आधार पर उन्हें महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण नहीं बनाया गया।
इस मामले में हुआ यह था कि मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों में वाहनों को लगाया गया था। इनके तेल का बिल अदा करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारियों और अस्पताल के अधीक्षकों से कहा गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम से बिल अदा करने के लिए पत्र भेजा गया। मुख्यमंत्री कार्यालय पत्र आने की वजह से किसी अधिकारी की इस रोकने की हिम्मत नहीं पड़ी और बिल जारी कर दिया गया। इसे ट्रेजरी में भी नहीं रोका गया।
इसमें फंसे अधिकारियों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री के यहां से बताया जाएगा तो बिल कौन रोकेगा? अगर बिल गलत पास हुआ था तो ट्रेजरी क्यों नहीं रोका? ट्रेजरी वालों का काम तो बिल चेक करने का ही है। कुछ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सत्ता से जुड़े कुछ नेता विभाग का बजट पास करवा कर लाते थे और कहते थे कि इतना पैसा टैक्सी तेल बिल के लिए देना है। अगर मामले की सीबीसीआईडी जांच होती तो और यह मकड़जाल और भी उजागर होता।