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देहरादून में महिलाओं की बस का हाल बेहाल

Fri, 13 Mar 2015 11:12 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 13 Mar 2015 11:12 AM IST
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nirbhaya bus service.

देहरादून में महिलाओं के लिए संचालित की गई निर्भया बसे बेहद खस्ताहाल हैं।

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बसों में न तो फर्स्ट एड किट है और न ही स्टेपनी। उखड़ चुकी सीटों से कीलें निकल रही हैं, जो खतरनाक साबित हो सकती हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि बसें तकनीकी रूप से फिट हैं। अधिकारियों के अनुसार, बेड़े में यही बसें है। नई बसों के आने पर उन्हें चलाया जाएगा।

68 महिलाओं ने किया सफर
उत्तराखंड परिवहन निगम की निर्भया बस सेवा को पहले दिन महिलाओं ने हाथोंहाथ लिया। दून से ऋषिकेश और हरिद्वार तक बसों ने दो-दो चक्कर लगाए। दून-ऋषिकेश रूट पर 164 और दून-हरिद्वार रूट पर 68 महिलाओं ने सफर किया।
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सफलता से उत्साहित अधिकारी आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इस बस सेवा का उद्घाटन बुधवार को वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने किया था।
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पहले चरण में ऋषिकेश और हरिद्वार के लिए दो-दो बसों का संचालन किया जा रहा है। दोनों बसें बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे आईएसबीटी से रवाना हुईं। जीएम संचालन दीपक जैन ने बताया यही रुझान रहा तो बसों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

नाराजगी ठीक, बजट तो दीजिए
बुधवार को निर्भया सेवा का उद्घाटन करने पहुंची वित्त मंत्री ने बसों की हालत पर अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई थी, लेकिन वे शायद इस बात से अंजान हैं कि रोडवेज के लिए स्वीकृत बजट की फाइलों पर उनका ही विभाग कुंडली मारकर बैठा है।

वित्त विभाग की मनमानी से परेशान परिवहन निगम के अधिकारियों को अब मुख्यमंत्री से गुहार लगानी पड़ रही है। आपदा में हुए भारी नुकसान के बाद परिवहन निगम 400 करोड़ के घाटे में आ गया था। इसमें से 122 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री माफ करवा चुके हैं।

निगम को हर साल 25 करोड़ रुपए का बजट शासन से मिलता है। लेकिन इस बार वित्त विभाग ने इस पर रोक लगा दी। विभाग का कहना है कि निगम को पहले पुराना लोन चुकाना होगा। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री रमेश चंद्र रतूड़ी ने कहा कि बजट जल्द जारी नहीं हुआ तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।

निगम को मिल सकता है आईएसबीटी
परिवहन निगम अब आईएसबीटी का संचालन अपने हाथों पर लेने के लिए तैयारी कर रहा है। फिलहाल इसका संचालन रैम्की कंपनी कर रही है। आईएसबीटी में बसों को खड़ा करने के लिए निगम हर महीने कंपनी को करीब 40 लाख रुपये देता है।


लेकिन, इसके बावजूद आईएसबीटी की हालत खराब है। हालांकि सूत्रों के अनुसार, रैम्की के साथ शासन का तीस साल का अनुबंध है। अनुबंध टूटने पर कंपनी कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

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