निपाह वायरस को लेकर उत्तराखंड में वन विभाग ने जारी किया Alert, ऐसे बरतें सावधानी
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केरल के कोझिकोड और मलापुरम जिलों में निपाह वायरस से हुई मौतों के बाद के बाद उत्तराखंड में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव कार्यालय ने निपाह वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है।
वन कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कहीं भी चमगादड़ और जंगल सुअर मृत या बीमार अवस्था में मिले तो तत्काल विभाग को सूचना दी जाए। हालांकि वन विभाग की ओर से अभी किसी भी जानवर के सैंपल जांच के लिए नहीं भेजे गए हैं।
पिछले एक सप्ताह में केरल में निपाह वायरस के चलते 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह वायरस कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संक्रमति व्यक्तियों का इलाज कर रही नर्स की भी इसके संक्रमण से मौत हो गई। महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा समेत कई राज्य पहले ही इसको लेकर अलर्ट जारी कर चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी निपाह वायरस पर चिंता जताई थी।
साथ ही सभी एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। अब उत्तराखंड वन विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) डीवीएस खाती के अनुसार सभी प्रभागों के डीएफओ और पार्कों के निदेशकों को अलर्ट कर दिया गया है।
वन कर्मियों को जंगल में चमगादड़ और जंगली सुअर के मृत या बीमार मिलने पर तत्काल सूचना देने को कहा गया है। वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। वहीं, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के निदेशक डॉ. वीबी माथुर के अनुसार अभी उनके संस्थान में इससे संबंधित किसी तरह का सैंपल जांच के लिए नहीं आया है।
क्या है निपाह वायरस
क्या है निपाह वायरस
यह इंसान तथा जानवरों में फैलने वाला नया संक्रमण है। 1998 के दौरान मलेशिया के कामपुंग सुनगेई निपाह में सबसे पहले इस वायरस की पहचान हुई। उस समय सुअरों को इसका वाहक बताया गया था।
हालांकि बाद में फैले इस वायरस का कोई वाहक नहीं पाया गया। बांग्लादेश में 2004 में यह वायरस फैला। इस बार इसका कारण संक्रमित चमगादड़ के खाए फलों का सेवन करना पाया गया। भारत में सबसे पहले यह वायरस जनवरी 2001 में सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) में फैला था जबकि अप्रैल 2007 में पश्चिम बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था।
ऐसे फैलता है यह वायरस
प्राकृतिक वाहक (चमगादड़) : संक्रमित चमगादड़ के खाए फलों का सेवन करने वाला व्यक्ति। एनआईवी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर
वायरस के लक्षण
वायरस के लक्षण
वायरस से प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत आती है। तेज बुखार और दिमाग में जलन, आलस आना, भूल जाना, कन्फ्यूजन रहना जैसे लक्षण महसूस होते हैं। सही समय पर इलाज नहीं होने की स्थिति में संक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाती है। संक्रमित व्यक्ति को आईसीयू में रखकर इलाज किया जाता है।
डरने की जरूरत नहीं, वायरस से निपटने को पुख्ता इंतजाम : स्वास्थ्य विभाग
वन विभाग की ओर से उत्तराखंड में निपाह वायरस को लेकर जारी अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। उत्तराखंड में फिलहाल निपाह वायरस का कोई खतरा नहीं है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के इससे निपटने के पुख्ता इंतजाम हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि निपाह वायरस केरल में एक विशेष क्षेत्र में फैला है। वायरस को लेकर अभी कोई ट्रेवल एडवाइजरी भी नहीं जारी की गई है।
ऐसे में राज्य के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। डॉ. पंकज सिंह का कहना है कि अभी केंद्र सरकार की ओर से भी निपाह वायरस को लेकर किसी प्रकार के दिशा-निर्देश नहीं जारी किए गए हैं, यदि भविष्य में किसी प्रकार की गाइड लाइन जारी की जाती है तो उसी के हिसाब से एहतियाती कदम उठाए जाएंगे।