उत्तराखंड निकाय चुनाव 2018: कोई पहले ही डाल गया पूर्व दर्जा राज्यमंत्री का वोट
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सरोवर नगरी में रविवार को मतदान के दौरान दो बूथ संचालकों पर गड़बड़ी के आरोप लगे। पूर्व दर्जा राज्यमंत्री डा. रमेश चंद्र पांडे ब्रेवरली कंपाउंड बूथ पर वोट डालने पहुंचे तो पता चला कि उनका वोट पहले ही कोई डाल गया।
इसी तरह पूर्व चेयरमैन मुकेश जोशी मंटू और अध्यक्ष पद की प्रत्याशी नलिनी सिंह नेगी के नामों के नीचे भी अंडरलाइन किया गया था। उन्हें भी वोट डालने से रोक दिया गया। हालांकि हंगामे के बाद सभी ने वोट डाला।
पूर्व दर्जा राज्यमंत्री डा. रमेश चंद्र पांडे रविवार सुबह वोट डालने प्राथमिक पाठशाला ब्रेवरली कंपाउंड में बने बूथ पर पहुंचे। जब वह मतदान अधिकारी के पास पहुंचे तो पता चला कि वोटर लिस्ट में उनके नाम के नीचे अंडरलाइन किया गया है। उन्हें बताया गया कि उन्हें वोट डालने का मौका नहीं दिया जा सकता है क्योंकि पहले ही उनका वोट डाला जा चुका है।
उन्हें तर्क दिया गया कि अगर उन्होंने वोट नहीं डाला है तो कोई अन्य वजह होगी। कुछ देर के बाद अध्यक्ष पद की निर्दलीय प्रत्याशी नलिनी नेगी भी वोट डालने पहुंचीं। उन्हें भी यही जवाब दिया गया है। इसके बाद रमेश पांडे ने कमरे का गेट बंद कर दिया। उन्होंने अधिकारियों से बात करवाने की मांग की। इसको लेकर लगभग 45 मिनट तक हंगामा होता रहा।
बमुश्किल उन्हें वोट डालने का मौका दिया गया। डा. पांडे ने कांग्रेसियों को वोट डालने से रोकने की साजिश बताया है। इसी तरह नलिनी नेगी को भी हंगामे के बाद वोट डालने का मौका दिया गया। पूर्व चेयरमैन मुकेश जोशी मंटू के साथ भी इसी तरह की घटना हुई। तीनों जनप्रतिनिधियों ने प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। सहायक निर्वाचन अधिकारी तहसीलदार कृष्णराम आर्या ने बताया कि इस तरह कोई शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
मतपत्र गलत फोल्ड करने को लेकर हंगामा
तीन बार की जगह दो बार मतपत्र फोल्ड करवाने को लेकर रविवार दोपहर लोनिवि बूथ पर हंगामा हो गया। अध्यक्ष पद की निर्दलीय प्रत्याशी दीपा मिश्रा ने यह कहते हुए विरोध किया कि दो बार मतपत्र को फोल्ड करवाने से एक निशान पर लगाए गए निशान की स्याही दूसरे निशान पर भी लग रही है।
ऐसे में मतगणना के दौरान या तो मतपत्र को निरस्त कर दिया जाएगा या फिर उस दौरान दो प्रत्याशी मतपत्र को अपना बताएंगे और विवाद होगा। काफी देर तक जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्होंने उच्च अधिकारियों को फोन किया। इसके बाद तहसीलदार कृष्णराम आर्या ने मौके पर पहुंच कर पीठासीन अधिकारी को तीन बार और तरीके से मतपत्र फोल्ड करवाने का निर्देश दिया।