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निकाय चुनाव 2018: कूल कैंपेनिंग और मजबूत रणनीति से रुद्रपुर में लहराया भगवा

Wed, 21 Nov 2018 03:01 PM IST
चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर
चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर Updated Wed, 21 Nov 2018 03:01 PM IST
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nikay chunav 2018 reason behind bjp winning
BJP

नगर निगम में लगातार दूसरी बार भाजपा के सिर जीत का सेहरा बंध गया। पार्टी में बगावत, भीतरघात के साथ ही बाजार में अतिक्रमण के नाम पर ध्वस्तीकरण और फिर नजूल को लेकर चौतरफा घिरी भाजपा ने कुशल रणनीति से रण को बड़े अंतर से जीत लिया। लगातार दो बार विधानसभा और दूसरी बार निगम में करारी हार से कांग्रेस खेमे में बेहद निराशा का माहौल है।

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दरअसल 20 अक्तूबर को भाजपा ने एलआईसी की नौकरी छोड़ने वाले रामपाल सिंह को प्रत्याशी घोषित किया था। अगले दिन कांग्रेस ने भी नंदलाल का प्रत्याशी बनाया था। दोनों ही चेहरे नए होने की वजह से पार्टियों के समक्ष जिताने की चुनौती थी।
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भाजपा के समक्ष सत्ता के कामकाज के इम्तिहान के साथ ही मेयर की सीट पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती भी थी। लेकिन मेयर और पार्षद के प्रत्याशियों के टिकट फाइनल होने के बाद भाजपा में कांग्रेस की अपेक्षा अधिक बगावत और असंतुष्ट खुलकर सामने आए थे। यही वजह रही थी कि पार्टी को 32 बागियों को छह साल तक के लिए निष्कासित करना पड़ा था। इसके अलावा बाजार में अतिक्रमण के नाम पर ध्वस्तीकरण और फिर सुर्खियों में आए नजूल के मुद्दे ने भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी।

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जनता ने दिया आशीर्वाद, अब खरा उतरने की चुनौती 

कांग्रेस ने जहां नजूल को प्रमुख हथियार बनाया, वहीं इसी नजूल को लेकर भाजपा ने रक्षात्मक रूप में लेकर जनता को भरोसे में लेने का काम किया। आक्रामक प्रचार की बजाए कूल कैंपेनिंग के साथ ही पार्टी ने खास रणनीति के तहत प्रभाव रखने वाले असंतुष्टों को मनाने का काम किया। नजूल को लेकर हुई सभा में मुख्यमंत्री की ओर से उजड़ने नहीं देने का आश्वासन जनता में खासा प्रभाव डाल गया।

यही वजह रही कि जिस रम्पुरा में चुनाव बहिष्कार की मुहिम सबसे तेज चली थी, वहां दो वार्डों 22, 23 में भाजपा के पार्षद जीत गए। वहीं वार्ड 24 में पूर्व मेयर सोनी कोली की चाची कमला देवी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। चुनाव में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश परिहार ने कहा कि पार्टी ने कूल कैंपेनिंग को ज्यादा तरजीह दी। कांग्रेस द्वारा नजूल को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों का तथ्यों के साथ जवाब देते हुए जनता का भरोसा भी जीता।  

नवनिर्वाचित मेयर रामपाल सिंह ने एलआईसी की सेल्स सहायक की नौकरी को छोड़ते हुए भाजपा के मेयर के टिकट के साथ ही राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने राजनीति में पैसा कमाने नहीं बल्कि सेवा करने के लिए उतरने की बात कही थी। जनता ने भी रामपाल पर भरोसा जताकर जीत का स्वाद चखाया है। अब रामपाल के समक्ष भी जनता की अपेक्षाओें पर खरा उतरने की चुनौतियां हैं। हालांकि प्रदेश और केंद्र में सरकार से रामपाल को विकास योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं आने वाली है। ऐसे में विकास कार्यों को लेकर उनकी संजीदगी आने वाले वक्त में सामने आ जाएगी।

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