{"_id":"58f04a1b4f1c1b6137cf931a","slug":"ngt-apply-fine-on-thdc-for-polluting-ganga","type":"story","status":"publish","title_hn":"अलकनंदा को प्रदूषित करने के लिए THDC पर 50 लाख का जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अलकनंदा को प्रदूषित करने के लिए THDC पर 50 लाख का जुर्माना
ब्यूरो / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 14 Apr 2017 09:33 AM IST
विज्ञापन
ngt
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने अलकनंदा नदी में मलबा गिराने व प्रदूषण फैलाने के लिए टेहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
विज्ञापन
एनजीटी ने टीएचडीसी को जुर्माने की यह राशि दो हफ्तों के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देने के लिए कहा है। इस राशि का इस्तेमाल ट्रिब्युनल के आदेश पर संबंधित इलाके के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
विज्ञापन
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची विमल भाई के मामले में यह फैसला सुनाया है। याची ने अमर उजाला की 12 अप्रैल, 2016 को प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर याचिका दाखिल कर यह मामला ट्रिब्युनल में उठाया था कि टीएचडीसी अलकनंदा नदी में मलबा डंप कर रहा है। टीएचडीसी ने इसे स्वीकार भी किया था और मलबा साफ कराने का आश्वासन भी दिया था।
विज्ञापन
याची ने आरोप लगाया था कि संबंधित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट न सिर्फ 2007 में हासिल पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है बल्कि नदी को भी गंभीर तरीके से प्रदूषित कर रहा है। वहीं एनजीटी ने याची के इन आरोपों को सही पाने के बाद परियोजना प्रस्तावक पर बड़ा जुर्माना लगाया है।
एनजीटी ने परियोजना प्रस्तावक को पचास लाख रुपये जुर्माने में से 20 लाख रुपये एजेंट और कांट्रैक्टर से वसूलने को कहा है। इसके अलावा 4 हफ्तों के भीतर आदेश के पालन संबंधी रिपोर्ट भी ट्रिब्युनल में दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पीठ ने मामले में राज्य के लोक निर्माण विभाग को कारण बताओ नोटिस देते हुए पूछा है कि निर्माण के दौरान अलकनंदा में मलबा और कचरा डालने के लिए विभाग पर भी पर्यावरणीय जुर्माना क्यों न लगाया जाए।