समूह ‘ग’ परीक्षा में अब मुन्ना भाईयों की खैर नहीं, विभाग ने शुरु की नई व्यवस्था
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अब समूह ‘ग’ श्रेणी के रिक्त पदों की परीक्षा में मुन्ना भाईयों की पहचान के लिए नई व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत परीक्षा से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी का बायोमीट्रिक सिस्टम से थम प्रिंट और फोटो लिया जाएगा। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पहली बार 25 फरवरी को आयोजित होने वाली ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीडीओ) पद की परीक्षा में इसे लागू करेगा।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए आयोग ने अभ्यर्थियों की बायोमीट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगाने की नई पहल की है। इससे परीक्षा में मुन्ना भाइयों की भी आसानी से पहचान हो जाएगी। परीक्षा के दौरान ही अभ्यर्थियों के दोनों हाथों के अंगूठे का प्रिंट लिया जाएगा, साथ ही अभ्यर्थी की फोटो खींची जाएगी। परीक्षा में चयनित होने के बाद प्रमाणपत्र सत्यापन के समय अभ्यर्थियों के थम प्रिंट और फोटो का मिलान किया जाएगा।
बता दें कि विवादों में रही वीडीओ के 196 पदों की लिखित परीक्षा रद्द होने के बाद हाईकोर्ट के आदेशों पर चयन आयोग दोबारा से परीक्षा आयोजित कर रहा है। 25 फरवरी को प्रदेश में 202 सेंटरों पर परीक्षा होगी। इस बार परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए आयोग ने कड़े इंतजाम किए हैं।
यह है वीडीओ भर्ती का प्रकरण
यह है वीडीओ भर्ती का प्रकरण
पंचायती राज विभाग में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के 196 पदों की भर्ती के लिए चयन आयोग ने 20 नवंबर 2015 को विज्ञप्ति जारी कर आवेदन मांगे थी। जिसमें कुल एक लाख 10 हजार ने आवेदन किया। मार्च 2016 में लिखित परीक्षा आयोजित की गई और 29 मार्च 2016 को परिणाम घोषित किया गया। लेकिन कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत की। अभ्यर्थियों द्वारा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई।
सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह को सौंपी। इस जांच में लिखित परीक्षा में कई अनियमितताएं पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्मिक विभाग ने 14 जून 2017 को भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने के आदेश दिए। इस मामले में हाईकोर्ट ने दोबारा से लिखित परीक्षा कराने के आदेश दिए। अब चयन आयोग दो साल बाद दोबारा 25 फरवरी परीक्षा करा रहा है।
भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम की नई व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, फर्जी तरीके से परीक्षा देने वालों पर नकेल कसने में भी आसानी होगी।
- संतोष बडोनी, सचिव, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग