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नई और पुरानी पुलिस रेंज कर देगी 'कंगाल'
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 17 Jan 2014 12:33 PM IST
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उत्तराखंड में नई पुलिस रेंज के गठन की कसरत परवान चढ़ने लगी है। आगामी बीस जनवरी की कैबिनेट में नई रेंज केगठन का प्रस्ताव रखा जाएगा।
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पुलिस रेंज के गठन का विरोध
हालांकि शासन व पुलिस विभाग में अभी भी एक खेमा इन नई पुलिस रेंज के गठन का विरोध कर रहा है। अफसरों की एक लॉबी तो इस कदम को फिजूलखर्ची करार दे रही है। लेकिन सूत्र बताते है कि सरकार ने नई पुलिस रेंज को गठन करने का निर्णय ले लिया है। पुरानी रेंज का स्वरूप भी बदलेगा।
दरअसल, पुलिस रेंज के साथ ही दो नई कमिश्नरी के गठन की चर्चा भी हो रही है। लेकिन एक कमिश्नरी को गठित करने के लिए भारी भरकम बजट की व्यवस्था करनी पड़ेगी। और, पुलिस विभाग में एक खेमा इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि नई पुलिस रेंज इस बार सलीके गठित हो।
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सरकार भी पिछले फेल प्रयोग की कहानी नहीं दोहराना चाहती। अफसर चाहते हैं कि लॉ एंड ऑर्डर व जनशक्ति के हिसाब से जिलों का बंटवारा होना चाहिए। लेकिन जो प्रस्ताव तैयार हुआ है उसमें प्रस्तावित अल्मोड़ा रेंज में लॉ एंड ऑर्डर की दृष्टि से कोई भी जिला संवेदनशील नहीं है। सभी पर्वतीय जिले शामिल हैं।
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दूसरा पेच भी फंसा है। एक कमिश्नरी को पूरी तरह स्थापित करने के लिए सौ करोड़ रुपया चाहिए। और दो कमिश्नरी का मतलब न्यूनतम 200 करोड़ रुपए की जरूरत है। क्योंकि राज्य सरकार के 48 विभाग होते हैं।
हर विभाग के तो नहीं लेकिन तीस विभागों में मंडलीय अधिकारियों की नियुक्ति भी करनी होगी। कमिश्नर से लेकर सभी मंडलीय अधिकारियों के लिए वाहन, कार्यालय, आवास, टेलीफोन, कार्यालय स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की जरूरत होगी।
और, यदि केवल कमिश्नर ही तैनात किए जाते हैं तो फिर कमिश्नरी ही आधी अधूरी रहेगी। इस काम के लिए सौ करोड़ रुपए एक कमिश्नरी में चाहिए।
एसडीआरएफ को लेकर हुई बैठक
शासन में गुरुवार को एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) के गठन की प्रगति की समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने पीएचक्यू के अफसरों के साथ बैठक की।
बैठक में जमीन के लिए अभी तक फोरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने की बात कही गई। एसीएस ने क्लीयरेंस लेने केलिए वन विभाग को जल्द फाइल केंद्र में भेजने को कहा है। बैठक में अपर पुलिस महानिदेशक रामसिंह मीणा समेत कई अफसर मौजूद रहे।