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नेपाल के मधेसी आंदोलन से उत्तराखंड को बड़ा खतरा

Tue, 29 Dec 2015 04:14 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 29 Dec 2015 04:14 PM IST
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nepal movement dangerous for uttarakhand.

उत्तराखंड की चीन और नेपाल से सटी 600 किलोमीटर लंबी सीमा सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है।

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ले. जनरल एमसी भंडारी (रि) मानते हैं कि नेपाल में चल रहा गतिरोध उत्तराखंड के लिए भी खतरा साबित हो सकता है। बावजूद इसके राज्य के पास अपनी कोई सामरिक रणनीति नहीं है। खास बात यह कि सुरक्षा जैसे गंभीर विषय के लिए कोई एडवाइजरी कमेटी (विशेष सलाहकार परिषद) तक गठित नहीं की गई है।

जनरल एमसी भंडारी ने सोमवार को राजधानी देहरादून के सुभाष रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता करते हुए कहा कि सुरक्षा के लिहाज से राज्य में एक एडवाइजरी कमेटी होनी चाहिए। एडवाइजरी कमेटी सीधे सीएम के आधीन हो और अन्य हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

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PM मोदी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को भेजेंगे पत्र

nepal movement dangerous for uttarakhand.

जनरल भंडारी पड़ोसी देश नेपाल में चल रहे मधेशी आंदोलन के संदर्भ में कहा कि नेपाल में चल रहे आंदोलन का बुरा असर किसी न किसी रूप में उत्तराखंड पर भी पड़ सकता है। चिंता इस बात की है कि आंदोलित मधेशियों ने अब हथियार उठाने शुरू कर दिए हैं।

अगर नेपाल आर्मी मधेशियों को खदेड़ती है तो वह सीमा पार कर उत्तराखंड में ही प्रवेश करेंगे। उन्होंने कहा कि नेपाल सीमा पर होने वाली हर उथल—पुथल पर चीन व पाकिस्तान की भी निगाह टिकी रहती है। वह इस बावत प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को पत्र भेजेंगे।

लंबी सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे और रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी फिलहाल सक्रिय राजनीति में आने से इंकार कर रहे हैं।

भारत - पाक के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल की उम्मीद जल्दबाजी
ले. जनरल (सेनि) एमसी भंडारी ने कहा कि भारत व पाकिस्तान के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल बने ऐसी उम्मीद करना जल्दबाजी होगा। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के विशेष रणनीतिकारों में शामिल रहे जनरल भंडारी का कहना है कि रिश्तों की डोर मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद होता रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर जाकर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय जगत में अच्छा संदेश दिया कि पाक के साथ दोस्ताना संबंध बनाने के लिए भारत तैयार है।

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