पहले पॉजिटिव बताया गर्भवती का ब्लड ग्रुप, बाद में निकला निगेटिव, नवजात की मौत
- परिजनों का अस्पताल में हंगामा, लापरवाह कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग
- डिलीवरी से पहले मां का ब्लड ग्रुप पॉजिटिव बताया, बाद में निकला निगेटिव
- डॉक्टर बोले-एनटीडी का इंजेक्शन नहीं लगने के कारण पीलिया से हुई शिशु की मौत
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा राजकीय अस्पताल में देर शाम जन्म के एक घंटे के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल की लैब में शिशु की मां का ब्लड ग्रुप पॉजिटिव बताया गया था लेकिन डिलीवरी के बाद मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव पाया गया।
यदि पहले निगेटिव ब्लड ग्रुप के आधार पर इंजेक्शन लग जाते तो उसकी जान बच सकती थी। ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत के नेतृत्व में अस्पताल पहुंचे लोगों ने नवजात की मौत होने पर जमकर हंगामा किया।
मकड़ों गांव निवासी लक्ष्मण सिंह रावत का कहना है कि उनकी पत्नी पूजा रावत की दूसरी डिलीवरी थी। शुक्रवार दोपहर बाद 3.30 बजे वह पत्नी को डिलीवरी के लिए अस्पताल लाए। डाक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी पत्नी की नॉर्मल डिलीवरी हुई है।
डिलीवरी होने के बाद 4.15 मिनट तक बच्चा स्वस्थ था। डिलीवरी के एक घंटे बाद उन्हें बच्चा सौंपते हुए नर्सों ने कहा कि बच्चे को बाल रोग डॉक्टर को दिखवा लो। इसके बाद बच्चे को वार्मर में रखने को कहा गया और ऑक्सीजन भी लगाई गई। साढ़े पांच बजे नवजात ने दम तोड़ दिया।
नवजात की मौत से गुस्साए ब्लाक प्रमुख हीरा रावत और उनकी टीम अस्पताल पहुंची उन्होंने अस्पताल के लैब कर्मचारियों और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि ब्लड ग्रुप की जांच तक लैब के लोग नहीं कर पा रहे हैं। इसमें रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
आशा कार्यकर्ता निर्मला पांडे का कहना है कि डॉक्टर ने मां के ब्लड ग्रुप के आधार पर डिलीवरी की है। लैब कर्मचारियों ने मां का ब्लड ग्रुप पहले पॉजिटिव बताया। बाद में सिविल से जांच की गई तो उसका ब्लड ग्रुप निगेटिव निकला। इसी आधार पर डिलीवरी हुई है। उन्होंने भी लैब की जांच पर संदेह जताया।
केस नॉर्मल डिलीवरी का था। पहले मां का ब्लड ग्रुप पॉजिटिव बताया गया। बाद में मैंने स्वयं उनके परिजनों से प्राइवेट से जांच कराने को कहा तो ब्लड ग्रुप निगेटिव आया। यदि समय पर ब्लड ग्रुप का पता चल जाता तो गर्भावस्था के तीन महीने बाद ही मां को एनटीडी का इंजेक्शन लग जाता। नवजात की मौत पीलिया से हुई है।
-डा. संतोष पार्की, सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट, राजकीय अस्पताल रानीखेत।
आधारहीन बात पर कभी भी बवाल नहीं करना चाहिए। लैब में पढ़े लिखे लोग टेस्ट कर रहे हैं। आज तक गलत रिपोर्ट नहीं आई है। अल्ट्रासाउंड सहित तमाम अन्य जांचों पर निर्भर करता है। प्राइवेट रिपोर्ट पर कैसे विश्वास कर सकते हैं। पूजा की दूसरी डिलीवरी है। ब्लड ग्रुप निगेटिव था तो पहले ही उसे एनटीडी का इंजेक्शन लगाया गया होगा।
-डा. संदीप दीक्षित, सीनियर पैथोलॉजिस्ट,राजकीय अस्पताल रानीखेत।