{"_id":"576d45044f1c1be763b47f94","slug":"national-green-tribunal-action-on-businessman","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुड़कीः एनजीटी की सख्ती से उद्यमियों के तेवर नरम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रुड़कीः एनजीटी की सख्ती से उद्यमियों के तेवर नरम
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 24 Jun 2016 08:04 PM IST
विज्ञापन
एनजीटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती से वर्षों से बिना अनुमति के चल रहे उद्यमियों के तेवर नरम पड़ गए हैं।
विज्ञापन
कई होटलों पर गाज गिरने के बाद जिले के 250 मध्यम व लघु उद्यमियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। केवल तीन माह में इतने रजिस्ट्रेशन होने से बोर्ड को 30 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
गौरतलब है कि जब कोई उद्योग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति हासिल कर लेता है तो माना जाता है कि संबंधित उद्योग प्रदूषण मानकों का पालन कर रहा है। किसी भी उद्योग को रजिस्टर्ड करने से पहले बोर्ड प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन सुनिश्चित करता है। पिछले करीब एक वर्ष से एनजीटी ने 50 से अधिक फैक्ट्रियां बंद करवाई थी।
विज्ञापन
इनमें से अधिकतर फैक्ट्रियां मानकों को पूरा करने और निरीक्षण के बाद फिर से चालू हो चुकी है। इसका असर जिले में उन करीब 300 मध्यम व लघु दर्जे के उद्योगों पर भी पड़ा जो वर्षों से बोर्ड से बिना अनुमति लिए संचालित हो रहे थे। इनमें से कई उद्योग भारी प्रदूषण भी उगल रहे थे। तीन माह पहले बोर्ड ने ऐसे 350 उद्योगों को नोटिस जारी किया था। जिनमें से अभी तक 250 उद्योग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।
विज्ञापन
इन उद्योगों की ओर जमा कराए गए रजिस्ट्रेशन शुल्क से करीब 30 लाख रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ है। इनमें ज्यादातर हरित और नीले श्रेणी में आने वाले उद्योग शामिल हैं। बोर्ड से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार तीन माह पहले तक बोर्ड में रजिस्टर्ड उद्योगों की संख्या 2100 थी जो अब बढ़कर 2350 पहुंच गई है। इसका लाभ यह होगा कि प्रदूषण बोर्ड को प्रदूषण के मद्देनजर इन उद्योगों की निगरानी करना आसान हो जाएगा।
सख्ती का असर दिखने लग गया है। पिछले तीन माह में जिले के 250 मध्यम व लघु श्रेणी के उद्योगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इससे प्रदूषण के मद्देनजर उद्योगों की निगरानी आसान होगी। साथ ही बोर्ड की आय में भी वृद्धि हुई है।
- डॉ. अंकुर कंसल, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड