{"_id":"0602efc8d8fb6baf776bf10ed2261e3c","slug":"nanda-raj-jat-yatra-facing-problem","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा ने श्रीनंदा राजजात यात्रा में खड़ी की चुनौतियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा ने श्रीनंदा राजजात यात्रा में खड़ी की चुनौतियां
विनय बहुगुणा
Updated Tue, 30 Jul 2013 03:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विनाशकारी जल प्रलय ने श्रीनंदा राजजात की तैयारियों पर पानी फेर दिया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद पहली बार आयोजित हो रहे सचल ‘हिमालयी महाकुंभ’ की कई महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थी। आपदा के बाद राज्य सरकार ने आयोजन को लेकर हाथ खड़े कर दिए। जबकि राजजात समिति ने परंपरागत तरीके से यात्रा निकालने का फैसला किया है। इन हालातों में इस हिमालयी महाकुंभ का सफल आयोजन यात्रा समिति के लिए खासी चुनौती है।
विज्ञापन
आयोजन के सिर्फ 30 दिन
हिमालय महाकुंभ श्रीनंदा राजजात के लिए 30 दिन शेष रह गए हैं। लेकिन आपदा के बाद से तैयारियां ठप पड़ी हैं। राजजात तैयारियों के तहत नौ सड़कों पर बीते वर्ष अक्तूबर-नवंबर से सुधारीकरण, चौड़ीकरण और डामरीकरण का काम शुरू किया जा रहा था। कमिश्नर दो बार निरीक्षण को आए। मुख्य अभियंता लोनिवि भी छह बार सड़कों का हाल जानने आए। लेकिन हालात संतोषजनक नहीं थे।
विज्ञापन
रास्ते ध्वस्त, लगातार खराब हो रहे मार्ग
परिणामस्वरूप थराली-देवाल-मुंदोली मोटर मार्ग पर थराली बाजार से तहसील राड़ीबगड़ तक 11 सौ मीटर हिस्सा पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गया। मुख्य बाजार में भी सत्तर मीटर की खाई बन गई थी जिसे अब भर लिया गया है। चेपडों गदेरे का लोनिवि कोई ट्रीटमेंट नहीं कर पाया। पिछले दस दिन से नंदकेशरी में चट्टानी हिस्सा भी लगातार खलल डाल रहा है।
विज्ञापन
कुमाऊं को जोड़ने वाले नंदकेशरी-ग्वालदम मोटर मार्ग पर स्क्रपर लगातार टूटते जा रहे हैं। मार्ग पर बड़े वाहनों की आवाजाही बंद है। जबकि छोटे वाहनों की आवाजाही भी बमुश्किल हो रही है। थराली-घाट, घाट-रामणी, घाट-सुतोल-कनोल, देवाल-लोहाजंग, घाट-थराली, आदिबदरी-नौटी मोटर मार्ग भी बदहाल हो चुके हैं।
मुख्य मार्ग खुलने की संभावना से इंकार
अब अधिकारी 29 अगस्त तक मुख्य मार्ग सहित अन्य कुछ सड़कों के खुलने की संभावना से साफ इंकार कर रहे हैं। इस हाल में इन मार्गो से पड़ावों और संबंधित गांवों तक रसद सहित अन्य जरूरी सामग्री कैसे पहुंचेगी, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
लाइफ लाइन न कर दे काम खराब
कर्णप्रयाग-ग्वालदम मोटर मार्ग पिंडरघाटी की लाइफ लाइन है। इस मार्ग से ही राजजात के कुलसारी पड़ाव पहुंचा जाता है। लेकिन मार्ग नारायणबगड़ के बाद से थराली तक छह से अधिक स्थानों पर बंद पड़ा है। भले ही बीआरओ एक हफ्ते भर में इन स्थानों पर मार्ग के पुर्ननिर्माण की बात कह रहा है।
बरसात से राजजात मार्गो को व्यापक नुकसान हुआ है। बरसात अगस्त-सितंबर या तक अक्तूबर तक भी होती है। इन परिस्थितियों में सड़कें अभी और कहां-कहां टूट जाए, कौन सी पुलिया बह जाए, डर बना हुआ है। व्यापक स्तर पर मार्गों पर मरम्मत कार्य शुरू करना फिलहाल संभव नहीं है।
- आरपी भट्ट, मुख्य अभियंता, लोनिवि गढ़वाल मंडल
श्रीनंदा राजजात के आयोजन को लेकर राज्य सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। यात्रा को किसी भी हाल में टाला नहीं जा सकता, लिहाजा राजजात समिति ने परंपरागत तरीके से यात्रा आयोजित करने का फैसला किया है। हम आगामी कुछ दिनों में सभी पड़ाव अध्यक्षों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे। हमने जो संकल्प लिया है, मां नंदा के आशीर्वाद और आम जनता के सहयोग से हम इसे पूरा करेंगे। यात्रा अपने परंपरागत रूट से गुजरेगी।
- डा. राकेश कुंवर, अध्यक्ष श्रीनंदा राजजात समिति
खबर पर राय देने के लिए क्लिक करें