उत्तराखंड: कॉर्बेट पार्क के बाघों की मौत की होगी सीबीआई जांच, हाईकोर्ट ने जारी किए आदेश
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हाईकोर्ट ने अमर उजाला में 24 अगस्त को प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए कॉर्बेट पार्क में बीते ढाई वर्षों में 40 बाघों और 272 तेंदुओं के मारे जाने तथा इसमें वन अधिकारियों की संलिप्तता की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस खबर में बताये गए बाघों के तोताराम, बाल्कू, बावरिया गिरोह के शिकारियों को एसएसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर तीन माह के भीतर उन्हें गिरफ्तार किए जाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने कॉर्बेट पार्क के ढिकाला जोन में निजी तथा व्यावसायिक जिप्सियों के प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाते हुए इनके बजाय 32 पर्यटक वाहनों को प्रवेश देने को कहा है। कोर्ट ने कॉर्बेट पार्क में तैनात रहे अधिकारियों की संपत्ति की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराने, अमानगढ़ और धुलवा बीट को पार्क में शामिल करने को कहा है।
कोर्ट ने कार्बेट पार्क के बफर जोन से गुज्जरों की बेदखली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि पार्क में बाघों की सुरक्षा के लिये पूर्व सैनिकों की भर्ती कर अस्थायी रूप से स्पेशल टाइगर फोर्स का गठन हो चुका है। नियमित टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की तैनाती छह माह में कर दी जाएगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और जस्टिस लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव ने अदालत को बताया कि कॉर्बेट पार्क में मृत नौ बाघों में से छह बाघों की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई थी। इन छह बाघों का विसरा जांच के लिये प्रयोगशाला भेजा गया है।
बीमार हाथियों का इलाज कराएं.....
इस मामले में अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान से नाराज कोर्ट ने सभी मृत बाघों की विसरा जांच रिपोर्ट तत्काल कोर्ट में पेश करने को कहा। हाईकोर्ट ने वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते और बीएल साह की कॉर्बेट पार्क की शोध पर आधारित रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि इन शोध को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के समक्ष पेश किया जाए। कोर्ट ने कॉर्बेट पार्क के बफर जोन में स्थित सुंदरखाल गांव को खाली करवा कर यहां के निवासियों को विस्थापित किये जाने के निर्देश भी दिये।
बीमार हाथियों का इलाज कराएं.....
हाईकोर्ट ने रिजॉर्टों से छुड़ाये गये बीमार हाथियों की जांच व उनका इलाज करने को कहा और टीबी से ग्रसित हाथियों को अन्य हाथियों से अलग रखने को कहा है। खंडपीठ ने पूर्व के आदेशों का पालन न होने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी हाईकोर्ट में पिकनिक मनाने आते हैं। कोर्ट ने पेश शपथ पत्र पर नाराजगी जताते हुए अपर मुख्य सचिव रणबीर सिंह से अदालत के आदेशों का पालन कराने में सहयोग करने को कहा।
सुंदरखाल का नाम लेने से डरते क्यो हैं अधिकारी
कॉर्बेट से सटे सुंदरखाल ग्राम को खाली कराने के निर्देश देते हुए कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि वन विभाग व प्रशासन के बड़े अधिकारी या तो इस गांव का नाम न जानने का दावा करते हैं या इसका नाम लेने से परहेज करते हैं। कोर्ट ने मामले में वस्तुस्थिति सही तरीके से रखने के लिए डीएफओ नेहा वर्मा की जमकर सराहना करते हुए उन्हें बहुत साहसी और उत्कृष्ट अधिकारी बताया।