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नैनीताल हाईकोर्ट : पुस्तकालय घोटाले में दायर याचिका को बताया राजनीति प्रेरित - उत्तराखंड सरकार
Thu, 24 Jun 2021 09:54 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 24 Jun 2021 09:54 AM IST
सार
कोर्ट ने राज्य सरकार को आपत्ति दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि नियत की।
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट में हरिद्वार में 2010 में हुए पुस्तकालय घोटाले के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिका राजनीति से प्रेरित है।
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अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि नियत की
राज्य सरकार की ओर से इस पर आपत्ति दाखिल करने की मांग की गई। जिसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को आपत्ति दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तिथि नियत की।
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विधायक निधि से लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से 16 पुस्तकालयों के लिए पैसा आवंटित किया
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2010 में हरिद्वार के तत्कालीन विधायक मदन कौशिक ने विधायक निधि से लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से 16 पुस्तकालयों के लिए पैसा आवंटित किया।
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आज तक धरातल पर किसी भी पुस्तकालय का निर्माण नहीं हुआ
पुस्तकालय बनाने के लिए भूमि पूजन से लेकर उद्घाटन और बाद के कार्यों की फाइनल पेमेंट भी कर दी गई थी, लेकिन आज तक धरातल पर किसी भी पुस्तकालय का निर्माण नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि विधायक निधि के नाम पर तत्कालीन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी सहित ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने बड़ा घोटाला किया है।
याचिका में कहा कि जिन स्थानों पर पुस्तकालय होने दर्शाए गए हैं वहां पर बरातघर, निजी आवास और धर्मशालाएं आदि हैं। इस मामले में कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) रही। आरईएस के तत्कालीन इंजीनियर ने बिना अस्तित्व में आए ही इन पुस्तकालयों का निरीक्षण किया और तत्कालीन सीडीओ ने डेढ़ करोड़ रुपये का पूरा भुगतान जारी कर दिया। याचिकाकर्ता ने मामले को बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।