उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, तीन साल में जमरानी बांध का निर्माण कार्य पूरा कराने के दिए आदेश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने लंबित जमरानी बांध का निर्माण तीन साल के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की याचिका पर शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि एक माह के भीतर बांध से संबंधित प्रस्ताव केंद्र को भेजें।
कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार भी इस प्रस्ताव का निस्तारण जल्द करें। हाईकोर्ट ने कहा कि बांध निर्माण के लिए संशोधित डीपीआर का निस्तारण छह माह के भीतर कराया जाए। रविशंकर जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 1975 में जमरानी बांध 61.25 करोड़ की लागत के साथ स्वीकृत हुआ था।
1982 में बांध का पहले चरण का काम पूर हुआ। इसके तहत गौला बैराज का निर्माण किया गया और 40 किलोमीटर की नहरें बनीं। 1988 में केंद्रीय जल आयोग से इसकी अनुमति मिली उस वक्त बांध की लागत 144.84 करोड़ पहुंच गई।
याचिका में कहा गया कि बांध निर्माण से उत्तर प्रदेश को 47 हजार और उत्तराखंड को नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया था। 2014 में फिर से डीपीआर बनाई गई, जिसमें लागत 2350.56 करोड़ पहुंच गई। बांध को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समझौता नहीं हो सका।