उत्तराखंड में निकाय कर्मचारियों की नियुक्ति अब आयोग से
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उत्तराखंड के नगर निकायों में अधिकांश नॉन सेंट्रलाइज्ड पद अब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के दायरे में होंगे। इन पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया आयोग के माध्यम से संचालित होगी।
इसको लेकर शहरी विकास विभाग की ओर से सोमवार को उत्तराखंड पालिका (अकेंद्रीयित) सेवा (समूह ग) नियमावली-2017 जारी कर दी गई है। इस नियमावली को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नियमावली में कर्मचारियों की नियुक्ति, अर्हता, भर्ती प्रक्रिया, स्थायीकरण, ज्येष्ठता, वेतन और पेंशन सभी प्रावधान तय कर दिए गए हैं।
निकायों के नॉन सेंट्रलाइज्ड (अकेंद्रीयित) कर्मचारियों के लिए अभी तक नियमावली नहीं थी। शहरी विकास विभाग द्वारा 2013 में पालिकाओं का ढांचा स्वीकृत किए जाने के बाद सेवा नियमावली बनाए जाने की जरूरत महसूस होने लगी थी। अभी तक अकेंद्रीयित कर्मचारी संबंधित निकायों के बोर्ड के दिशा निर्देश के मुताबिक काम करते थे।
इस नियमावली के लागू होने के बाद अकेंद्रीयित सेवा के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों यह फायदा होगा कि उनको यह विकल्प देने का अधिकार होगा कि वह पालिका की केंद्रीयित सेवा में आना चाहते हैं अथवा उसी संवर्ग में बने रहना चाहते हैं।
भर्ती - भर्ती का माध्यम
कंप्यूटर डाटा एंट्री आपरेटर - 70 फीसदी सीधी भर्ती से आयोग के माध्यम से
लेखा लिपिक - सीधी भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से
मानचित्रकार - सीधी भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से
पर्यावरण पर्यवेक्षक - सीधी भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से
कर संग्रहकर्ता - सीधी भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से
क्या होगा वेतनमान
पदनाम - वेतन बैंड/ ग्रेड वेतन
कंप्यूटर डाटा एंट्री आपरेटर - 5200-20200 ग्रेड वेतन 2000
लेखा लिपिक - 5200-20200 ग्रेड वेतन 2000
मानचित्रकार - 5200-20200 ग्रेड वेतन 2800
पर्यावरण पर्यवेक्षक - 5200-20200 ग्रेड वेतन 2000
कर संग्रहकर्ता - 5200-20200 ग्रेड वेतन 2000
लिपिक पदों पर पदोन्नति चयन समिति द्वारा
लिपिक वर्गीय पदों पर पदोन्नति लिखित परीक्षा के बाद चयन समिति के माध्यम से की जाएगी। चयन समिति का अध्यक्ष संबंधित नगर निकायों के नगर आयुक्त या संबंधित नगरपालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्ष होंगे।
समिति में तीन सदस्य होंगे, जिनमें जिलाधिकारी द्वारा नामित जिला स्तरीय अधिकारी और वित्त सेवा के कोषाधिकारी या उप कोषाधिकारी होंगे। संबंधित नगर निगमों के उप नगर आयुक्त और नगरपालिका परिषद और नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी सदस्य होंगे।
क्या है नॉन सेंट्रलाइज्ड सर्विस
पूर्व में यह व्यवस्था रही है कि संबंधित निकाय अपने कार्य की आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों की भर्ती कर लेते थे। बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर उन्हें नियुक्त कर दिया जाता था। संबंधित बोर्ड ही उनके वेतन-भत्तों की व्यवस्था करता था। इस सर्विस के तहत कर्मचारी को अपने पूरे कार्यकाल में उसी जगह पर सेवा देनी होती है, जहां पर उसे तैनाती मिली है।
यानी उसका कहीं और स्थानांतरण नहीं हो सकता। अब शासन ने नॉन सेंट्रलाइज्ड के कई पदों को आयोग के दायरे में कर दिया है। अब जो पद इस दायरे में आए हैं और उसके लिए संबंधित कर्मचारी ने विकल्प दिया है, उसका कहीं भी तबादला हो पाएगा। उसकी और नॉन सेंट्रलाइज्ड सर्विस के कर्मचारी के वेतन-भत्तों में भी अंतर होगा।
प्रदेश में कितने निकाय
नगर निगम - 06
नगर पालिका - 38
नगर पंचायत - 46