मसूरी: शिफन कोर्ट में प्रशासन ने ध्वस्त किए 15 मकान, 10 सितंबर तक जमीन खाली करने की मोहलत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्टे अवधि खत्म होने के बाद सोमवार को शिफन कोर्ट की अवैध बस्ती पर प्रशासन का डंडा चला। पहले ही दिन यहां 15 मकान ध्वस्त कर दिए गए। हालांकि, बाद में विधायक गणेश जोशी की मांग पर बाकी परिवारों को 10 सितंबर तक की मोहलत मिल गई है। अन्य परिवारों ने प्रशासन को दस सितंबर तक जमीन खाली करने का शपथपत्र दिया है।
मसूरी पुरकुल रोपवे परियोजना के तहत गांधी चौक स्थित शिफन कोर्ट में प्लेटफार्म बनाया जाना है।
लेकिन, यहां सरकारी भूमि पर बस्ती बसी हुई है और कुल 84 परिवार यहां रह रहे हैं। मामले में कोर्ट की ओर से जारी स्टे की अवधि समाप्त होने के बाद सोमवार को पुलिस-प्रशासन की टीम ने एडीएम अरविंद पांडेय और एसपी सिटी श्वेता चौबे के नेतृत्व में अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अभियान का जमकर विरोध किया। अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए प्रशासन ने मसूरी गांधी चौक और शिफन कोर्ट तक के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। अभियान के पहले दिन टीम ने 15 मकान ध्वस्त कर दिए।
अतिक्रमण हटाने के दौरान टीम और लोगों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। मौके पर पहुंचे विधायक गणेश जोशी ने प्रभावितों को विस्थापित करने का आश्वासन दिया। उधर, मजदूर संगठन ने प्रशासन की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। उन्होंने बताया कि सीएम ने 10 सितंबर तक अभियान को रोकने के निर्देश दिए हैं। यह मोहलत लोगों को खुद ही सरकारी जमीन खाली करने के लिए दी गई है। इस पर देर शाम तक बाकी परिवारों ने 15 दिनों में स्वयं अतिक्रमण ध्वस्त करने का शपथ पत्र प्रशासन को सौंप दिया।
अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम में सिटी मजिस्ट्रेट गोपाल राम बिनवाल, मसूरी एसडीएम मनीष कुमार, अधिशासी अधिकारी आशुतोष सती, मसूरी कोतवाल देवेन्द्र असवाल, मसूरी के पूर्व कोतवाल भावना कैन्थोला सहित कई अन्य अधिकारी शामिल थे।
रोपवे: 16 मिनट में दून से मसूरी
देहरादून से मसूरी आने वाले पर्यटकों को जाम के झंझट से निजात दिलाने के लिए देहरादून-मसूरी रोपवे बनाया जा रहा है। रोपवे से पर्यटक महज 16 मिनट में ही देहरादून से मसूरी का सफर तय कर सकेंगे। अभी इस सफर में एक-डेढ़ घंटे तक का समय लगता है। इस रोपवे के निर्माण का जिम्मा फ्रांस की कंपनी पोमा इंटरनेशनल को दिया गया है। पर्यटन विभाग के साथ कंपनी का करार पूर्व में हो चुका है और निर्माण की लागत तकरीबन 450 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आप और कांग्रेस का प्रदर्शन
इस दौरान अतिक्रमण हटाए जाने के विरोध में आप पार्टी के कार्यकर्ता पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला और कांग्रेस प्रदेश महामंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मसूरी गांधी चौक पर प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि गरीब को हटाने के लिए प्रशासन द्वारा तमाम भर की फोर्स दी गई। परंतु गरीबों को समायोजित करने के लिए कोई बात नहीं कर रहा है जो कि गलत है। उन्होंने कहा कि हम पुरुकुल रोपवे परियोजना का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन योजना गरीबों की छाती पर रखकर बनाई जाएगी तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मसूरी में शिफन कोर्ट में अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ऐसे में पहले चरण में 84 अतिक्रमण में से उन लोगों के अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं, जिनके द्वारा स्वयं अतिक्रमण को हटाने का शपथ पत्र नहीं दिया गया है। जिनके द्वारा शपथ पत्र दिया गया है, उन्हें 10 सितंबर तक का समय दे दिया गया है। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद पूरी कार्रवाई अमल में लाई गई है। ऐसे में न्यायालय के आदेश का हर हाल में पालन कराया जा रहा है।
- अरविंद पांडे, एडीएम प्रशासन
पीएसी जवानों को लेकर पहुंची बस के ब्रेक फेल हुए, बड़ा हादसा टला
शिफन कोट का अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल को लेकर गई बस के अचानक ब्रेक फेल हो गए। बस अचानक तेजी से पीछे की ओर चलने लगी। सूझबूझ दिखाते हुए किसी तरह उसे रोका गया, जिससे वह खाई में गिरने से बच गई। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। इस संबंध में विधायक गणेश जोशी ने भी पुलिस से जानकारी ली।
बस देहरादून से पीएसी जवानों को लेकर आई थी, जिसमें दो दर्जन से अधिक जवान थे। जब बस को शिफन कोट के ऊपर रोक कर जवानों को उतारा जा रहा तो उसके ब्रेक फेल हो गए और वह पीछे की तरफ चलने लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि सूझबूझ दिखाते हुए बस को न रोका जाता तो वह पुलिसकर्मियों सहित गहरी खाई में गिर सकती थी। मौके पर मौजूद देहरादून नगर पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने बताया कि बस के अचानक ब्रेक फेल हो गए थे, जिसे तुरंत ही ईंटें लगाकर रोक दिया गया। संवाद