मिसालः हिंदू धर्मग्रंथों के प्रसार में लगी है ये मुसलिम बेटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीर्थनगरी ऋषिकेश में मुसलिम समुदाय की ये बेटी हिंदू धर्मग्रंथों का ज्ञान बाट रही है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें...
'सभी हिंदू धर्मग्रंथ संस्कृत में वर्णित हैं। इनके संदेश को संस्कृत के ज्ञान के बिना नहीं जाना जा सकता। लिहाजा मुझे इस भाषा के प्रति लगाव हुआ। मैंने इसे सीखा और इसी विषय में बीएड भी किया। वैसे भी संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, जीवन में हर मोड़ पर हमें संस्कृत की जरूरत पड़ती है।' यह कहना है देववाणी संस्कृत भाषा में गहरी रुचि रखने वाली मुसलिम समुदाय से जुड़ी सोनी निशा का।
सोनी निशा का कहना है उन्हें वेदों का अध्ययन और उनके सारतत्व को जानना अच्छा लगता है। संस्कृत के प्रति जिज्ञासा बढ़ी तो कक्षा नौ से ही पढ़ना शुरू किया। बीए तक रेग्युलर संस्कृत को पढ़ा। एमए संस्कृत में दाखिला लेना चाहती थीं, मगर ऋषिकेश पीजी कॉलेज में परास्नातक में यह विषय नहीं है।
संस्कृत से प्राइवेट एमए कर रही हैं। सोनी निशा के देववाणी संस्कृत के प्रति रुचि को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि कुरुक्षेत्र विवि से बीएड में खासतौर पर संस्कृत विषय को चुना। वह साल 2014 में बीएड कर चुकी हैं। सोनी निशा बताती हैं कि नवीं कक्षा में हमारे संस्कृत शिक्षक वंशीधर पोखरियाल बेहद सलीके से इसे पढ़ाते थे, उनके पढ़ाने के ढंग से सोनी की संस्कृत में रुचि बढ़ी।
60 फीसदी अंक मिले तो करेंगी पीएचडी
सोनी निशा बताती हैं कि एमए संस्कृत फाइनल ईयर के पेपर दिए हैं। यदि उन्हें 60 प्रतिशत अंक मिले तो इस विषय में पीएचडी करने का मन है। वह संस्कृत को कॅरियर बनाना चाहती हैं। इस भाषा को जानने का लाभ लोगों को संस्कृत में वर्णित धर्मग्रंथों का संदेश बांटने में देना चाहती हैं।
परिजनों को रामायण, महाभारत का अनुवाद सुनाया
सोनी बताती हैं कि संस्कृत विषय लेने पर शुरुआती दौर में उन्हें अपने घर में ही विरोध झेलना पड़ा। नाते रिश्तेदार भी संस्कृत सीखने, बोलने पर ताने देते थे। कई दफा उनसे बहस भी हो जाती थी।
संस्कृत पढ़नी आ गई तो परिजनों को रामायण और भगवद्गीता के श्लोकों का हिंदी में अनुवाद सुनाया। वह धर्मग्रंथों के संदेश से काफी प्रभावित हुए और उन्हें भी संस्कृत विषय में रुचि होने लगी। कहती हैं अब वह मेरे संस्कृत भाषा के प्रेम का विरोध नहीं करते।
बहन को दिलाया बीए में संस्कृत
सोनी निशा ने कहा उनके गुरुजी बताते थे कि संस्कृत में कॅरियर बनाने का काफी स्कोप है, लिहाजा उन्होंने छोटी बहन को भी बीए में संस्कृत विषय दिलाया है। उसे भी अब इस भाषा में काफी दिलचस्पी है।
बोलने के लिए अटेंड करना चाहती हैं कार्यशालाएं
बकौल सोनी, मुझे संस्कृत पढ़ने और पढ़ाने में परेशानी नहीं होती। मगर मैं संस्कृत में निर्बाध गति से बोलना सीखना चाहती हूं। इसके लिए विद्या भारती द्वारा संचालित होने वाली कार्यशालाएं अटेंड करना चाहती हैं। जिससे कम समय में आसानी से संस्कृत बोलना सीख सकूं।
सीएम कर चुके सम्मानित
सोनी निशा को बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए अमर उजाला द्वारा विश्व महिला दिवस पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत सम्मानित कर चुके हैं। वह कक्षा दस में पढ़ने के दौरान से बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं।