बर्खास्त विधायक चैंपियन का पक्ष लेना विधायक भट्ट को पड़ा भारी, सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में भाजपा से बर्खास्त खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के निष्कासन पर दुख प्रकट करना बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट को भारी पड़ गया। उनकी फेसबुक पोस्ट की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है।
उन्होंने चैंपियन की विदाई पर विधायक ने सोशल मीडिया पर दुख प्रकट किया और उन्हें अपने में गुणात्मक सुधार के लिए सुझाव दिए हैं। जिसके बाद बबाल मच गया। बदरीनाथ विधायक राज्य भाजपा में पहले ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्होंने चैंपियन से सहानुभूति जताई है।
विधायक का कहना है कि भाजपा में शामिल होने के बाद भी कांग्रेस ने चैंपियन के साथ धोखा किया है। मेरी चैंपियन से यही अपेक्षा है कि छह साल भाजपा से बाहर रहने पर भी वे भाजपा के विचारों को अनुश्रवण करें और कांग्रेस मित्रों की इस चाल को नाकाम करें। सुझाव देना मैंने अपना कर्त्तव्य समझा। वे चार बार से विधायक हैं। व्यक्ति में विकृति आती है, तो गलत शब्द कहना बहुत आसान है।
परंतु उसे सुधरने का मार्ग दर्शन कर सुझाव दिया जान भी जरूरी है। कहा कि खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के अंदर गुणात्मक सुधार लाने के लिए जो सुझाव सोसल मीडिया के माध्यम से दिया, वह सही किया है। मैंने वह सब कुछ समझाने व सुधार लाने की नियत से कहा है।
प्रणव चैंपियन के निष्कासन पर टिप्पणी से कतराए वन मंत्री
भाजपा से निष्कासित हुए खानपुर विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन पर टिप्पणी करने से वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत कतराते नजर आए। मल्लीताल स्थित नैनीताल क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि चैंपियन के विवाद और उनको निष्कासित करने के विषय में उन्हें अधिक जानकारी नहीं है, इसलिए वह इस संबंध में कोई टिप्पणी नही करेंगे।
वहीं देवप्रयाग में खुले शराब प्लांट को उन्होंने सरकार की सकारात्मक पहल बताया।
कहा कि शराब प्लांट का खुलना प्रदेश के किसानों के हित में है। प्रदेश में भारी मात्रा में फलों को उत्पादन होता है, जिसे सही बाजार नहीं मिलने से किसानों को भारी नुकसान होता है। प्लांट के खुलने से किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग में नए युवा अधिकारियों की नियुक्तियां की जा रही है।
इसी क्रम में प्रदेश को पूर्व में छह आईएफएस ऑफिसर मिल चुके हैं, इसके अतिरिक्त रेंजर स्तर के अधिकारियों के प्रमोशन और भर्ती के लिए अधियाचन उनके स्तर से भेजा गया है। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट गार्ड भर्ती का मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है, नतीजतन फील्ड स्टाफ की कमी बनी है।