रक्षा मंत्रालय ने बढ़ाई सीमांत सड़कों की डेडलाइन
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रक्षा मंत्रालय ने एक बार फिर इंडो चाइना बार्डर रोड (आईसीबीआर) परियोजना की डेडलाइन बढ़ा दी है।
परियोजना के तहत चीन सीमा पर बन रही 73 सड़कों के लिए डेडलाइन 2012 तय थी, जिसे बढ़ाकर अब 2020 कर दिया गया। मंत्रालय ने इस डेडलाइन को तीसरी बार बढ़ाया है।
चीन सीमा तक सड़कों के निर्माण में हो रही देरी के चलते भारतीय सैनिक और अद्धसैनिक बलों की चौकसी प्रभावित हो रही है। विवादित बाडाहोती सेक्टर जैसे क्षेत्रों में चीन सेना के बढ़ते दखल को देखते हुए इन सड़कों का निर्माण बेहद जरूरी है।
परियोजना के तहत उत्तराखंड में 375 किलोमीटर लंबी 19 सामरिक सड़कें प्रस्तावित हैं। उत्तराखंड से लगती 350 किलोमीटर चीन सीमा तक सैन्य पहुंच आसान बनाने के लिए 14 सड़कें बीआरओ के अधीन हैं। उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ में बनने वाली सड़कों की निर्माण रफ्तार बेहद धीमी है।
61 में से 22 सड़कें बना पाया बीआरओ
2006-07 से केवल दो सड़कों का निर्माण पूरा कर पाया है। जबकि 200 किलोमीटर लंबी सड़कों के लिए खुदाई और कटान हो गया है और 60 किलोमीटर को पक्का किया गया है। इसके अलावा सौ किलोमीटर लंबी पांच सड़कें सीपीडब्ल्यूडी के जिम्मे हैं। इसमें सबसे लंबी 43 किलोमीटर की न्यू-सोबला-सेला-टेडांग सड़क के लिए अभी 10 किलोमीटर ही निर्माण हो पाया है।
बीआरओ के मुताबिक वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की आपत्तियों का निस्तारण समय से नहीं होने के साथ भूमि हस्तांतरण में देरी और निर्माण सामग्री की उपलब्धता नहीं होने से निर्माण में दिक्कत आ रही है।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में बीआरओ के अधीन 3417 किलोमीटर लंबी 61 सड़कों का निर्माण वर्ष 2012 तक पूरा करने का लक्ष्य था। इसमें अभी तक सिर्फ 707 किलोमीटर लंबी 22 सड़कें ही बन पाई हैं। इसमें दो सड़कें उत्तराखंड की हैं। सीपीडब्यूडी के पास चीन सीमा पर कुल 12 सड़कें हैं, जिनमें पांच उत्तराखंड में हैं।
39 सड़कों की नई डेडलाइन
वर्ष 2016 तक पांच सड़कें
वर्ष 2017 तक 8 सड़कें
वर्ष 2018 तक 12 सड़कें
वर्ष 2019 तक 8 सड़कें
वर्ष 2020 तक 6 सड़कें