गंगा में खनन पर पूरी तरह रोक, आदेश जारी होते ही शिवानंद ने तोड़ा अनशन
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केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा में खनन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही गंगा के पांच किलोमीटर के दायरे में क्रशिंग पर भी पूरी तरह प्रतिबंधित लगा दिया गया है।
हरिद्वार जिलाधिकारी, एसएसपी और उत्तराखंड सरकार को आदेश का पालन कराने के निर्देश देते हुए बोर्ड ने साफ किया कि धारा के उल्लंघन पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। आदेश की कापी मिलने पर स्वामी शिवानंद ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। हालांकि जिलाधिकारी ने फिलहाल ऐसा कोई आदेश मिलने से इनकार किया है।
गंगा में खनन पर प्रतिबंध और तटीय इलाकों में चल रहे स्टोन क्रशरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर मातृसदन लंबे समय से अनशन कर रहा था। इसके विरोध में मातृसदन ने सात नवंबर को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को भी पत्र भेजा था। इसका संज्ञान लेते हुए मंत्रालय के अधीन नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के महानिदेशक यूपी सिंह ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा।
पांच किमी के दायर में में क्रशर पर प्रतिबंध
इस पर बोर्ड ने गंगा में पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 लागू की। इसके तहत गंगा में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में क्रशिंग पर भी प्रतिबंध लगाया। हरिद्वार डीएम, एसएसपी को एक्ट लागू कराने के आदेश जारी किए।
बुधवार सुबह केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय का आग्रह पत्र और आदेश की एक कापी मातृसदन आश्रम पहुंची। आग्रह पत्र में अपर सचिव और महानिदेशक यूपी सिंह ने स्वामी शिवानंद से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया गया।
पत्रकारों से बातचीत में स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा में खनन रोकने में शासन-प्रशासन के नाकाम रहने पर केंद्रीय मंत्रालय ने गंगा में धारा-5 लागू कर दी है। इस पर वह अपना अनशन समाप्त कर रहे हैं। उम्मीद जताई कि इस आदेश से खनन को लेकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारी और माफिया सीधे जेल जाएंगे।
लगातार उल्लंघन पर सात साल की सजा
पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 के तहत पहली बार आदेश का उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि बार-बार आदेश का उल्लंघन किया जाता है तो सात साल की सजा और जुर्माना दोगुना हो जाएगा।
आदेश के अनुपालन में पुलिस और प्रशासन को मिलकर अवैध खनन पर शिकंजा कसना होगा। खनन करने वालों को नोटिस देने से लेकर जुर्माना व मुकदमे की कार्रवाई कराई जाएगी।
जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने बताया कि अभी उन्हें इस आशय का कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश का अध्ययन करने के बाद इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है।
ऐसे चला मातृसदन का अनशन
इसके विरोध में राष्ट्रपति सहित पांच माननीयों को इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए पत्र भी भेजा था। सात दिन में जवाब न मिलने पर शिवानंद ने जल छोड़ दिया था। इसी बीच प्रशासन और पुलिस के बलपूर्वक आश्रम में घुसने पर 48 घंटे जल ग्रहण करने पर सहमति बनी थी। लेकिन कुछ कार्रवाई नहीं की।
इस पर स्वामी शिवानंद ने फिर बुधवार से जल त्यागने का फैसला लिया, लेकिन सुबह मातृसदन में बोर्ड के आदेश की एक कापी मिलने के बाद अनशन स्थगित कर दिया गया।