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जम्मू-कश्मीर: पुलवामा अातंकी हमले में शहीद हुआ उत्तराखंड का लाल, देर रात पहुंचेगा पार्थिव शरीर

Tue, 20 Nov 2018 07:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 20 Nov 2018 07:58 AM IST
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militants attacked crpf camp pulwama jammu kashmir uttarakhand jawan martyred
चंद्रिका प्रसाद (फाइल फोटो)

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में रविवार रात आतंकी हमले में सीआरपीएफ की 183वीं बटालियन के हवलदार चंद्रिका प्रसाद शहीद हो गए। रविवार रात करीब 10 बजे जैसे ही उनके शहीद होने की सूचना मिली, खेलड़िया में रह रहे परिजनों में कोहराम मच गया।

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शहीद की पार्थिव देह को दिल्ली से होते हुए यहां लाया जा रहा है। देर रात उनके पार्थिव शरीर के पैतृक आवास पर पहुंचने की उम्मीद है। मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ शहीद की अंत्येष्टि की जाएगी। 
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भारत नेपाल सीमा से लगे खेलड़िया निवासी सीआरपीएफ के हवलदार चंद्रिका प्रसाद (50) पुत्र बृजनंदन प्रसाद का परिवार मूलरूप से गईल गांव, बरहलगंज जनपद देवरिया (यूपी) का रहने वाला है। उनका परिवार करीब 50 साल पहले तराई में आकर बस गया था। चंद्रिका प्रसाद 1984 में सीआरपीएफ में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे।
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वर्तमान में वह कश्मीर के पुलवामा जिले के दूरस्थ क्षेत्र में तैनात थे। वहां चुनाव ड्यूटी पर जाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही काकपोरा रेलवे स्टेशन के पास के कैंप में बुलाया गया था। इसी दौरान आतंकियों के हमले में चंद्रिका प्रसाद को गोली लग गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। 

मां को रविवार रात मिल गई थी बेटे के शहादत की सूचना

शहीद चंद्रिका प्रसाद की मां रामरति के मोबाइल पर रविवार रात करीब 10 बजे उनकी शहादत की सूचना मिली। सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया है। शहीद के परिवार में पत्नी तीन पुत्र और पांच पुत्रियां है। उनके तीनों बेटों और दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है। छोटी पुत्रियों में नीलू ने बीए और किरन ने इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि कोमल पास के ही इंटर कॉलेज में आठवीं में पढ़ती है। झनकईया थानाध्यक्ष प्रभात कुमार ने शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को ढाढ़स बंधाया। एसडीएम विजयनाथ शुक्ल ने बताया कि देर रात शहीद की पार्थिव देह के पहुंचने पर वह उनके घर पहुंचेंगे। 

जनवरी में ही होने वाली थी बेटी की शादी 
पुलवामा जिले में आतंकी हमले में शहीद हुए चंद्रिका प्रसाद ने रविवार शाम करीब चार बजे घर पर फोन कर मां रामरति सहित पूरे परिवार से बातचीत की थी। तब उन्हें क्या पता था कि परिवार से यह उनकी अंतिम बातचीत होगी। उन्होंने परिजनों को बताया था कि उन्हें चुनाव ड्यूटी पर जाना है, जिसके बाद घर आकर नीतू की शादी की तारीख तय करेंगे। शहीद के बड़े पुत्र अनिरुद्ध प्रसाद ने बताया कि उनकी बहन नीतू की शादी जनवरी में तय की गई थी और यह इंतजार हो रहा था कि पिता के घर आते ही तारीख तय कर दी जाएगी। इससे पहले चंद्रिका प्रसात तीन माह पहले छुट्टी पर घर आए थे। 

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