अखिर क्यों उत्तराखंड के 78 गांव हो गए 'भुतहा'?
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उत्तराखंड प्रदेश में एक दशक के अंदर गढ़वाल मंडल के पांच पर्वतीय जनपदों में 78 गांव 'भुतहा' हो गए हैं। सहूलियतों की कमी से कभी गुलजार रहने वाले इन गांवों में आज सन्नाटा पसरा है। पांच पर्वतीय जिलों में गैर आबाद गांवों की संख्या बढ़कर अब 553 हो गई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में हुई जनगणना में गढ़वाल मंडल के पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले में 475 गैर आबाद गांव थे। इनमें सर्वाधिक 313 गैर आबाद गांव पौड़ी में थे। राज्य गठन के बाद 2011 में हुई जनगणना में मंडल के इन पांच पर्वतीय जिलों में गैरआबाद गांवों की संख्या 553 हो गई है।
एक दशक में जो 78 गांव गैरआबाद हुए हैं उनमें से टिहरी के 37, पौड़ी के 28, उत्तरकाशी के नौ, रुद्रप्रयाग और चमोली के दो-दो गांव शामिल हैं। इन गांवों दिल्ली, देहरादून जैसे महानगरों में बस गए हैं।
कई परिवार समीप के नगरीय क्षेत्रों और सुविधा वाली जगहों में आ गए है। कोट ब्लाक के बंडुल समेत कई गांव गैर आबाद की कगार पर पहुंच गए हैं। इन गांवों में भी अब एक या दो लोग रह रहे हैं।
गांवों को आबाद करने का बखान
उत्तराखंड सरकार का दावा है कि पलायन से प्रदेश के पर्वतीय जिलों में गैर आबाद हो चुके गांवों की संख्या 1065 से घटकर 1059 हो गई है, लेकिन सरकार सदन में यह जानकारी नहीं दे पाई कि आखिर वह कौन से छह गांव हैं जो दोबारा आबाद हो गए हैं।
हालांकि सरकार यह दावा करती रही कि विभागीय योजनाओं के माध्यम से हुए प्रयासों से गैर आबाद गांवों की संख्या कम हुई है। प्रश्नकाल में सदस्य महावीर सिंह रांगड़ ने गांवों से पलायन रोकने और गैर आबाद गांवों को दोबारा बसाने की कार्ययोजना पर सवाल पूछा।
संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने बताया कि पलायन को रोकने के लिए सरकार मेरा गांव मेरा धन, मेरा वृक्ष मेरा धन, मेरा गांव मेरा तालाब, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, राज्य की नई सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम बढ़ावा, वन प्रबंधन परियोजना जैसी 22 योजनाएं चला रही है।
मंत्री ने बताया कि 2001 में 1065 गांव गैर आबाद थे जो 2011 की जनगणना में घटकर 1059 रह गए हैं, जिसे और कम करने के लिए प्रयास चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया है, जिससे वित्तीय वर्ष 2015-16 के आय व्यय में 24 योजनाओं की फंडिंग अनुपात परिवर्तित हो गई है।
आठ योजनाओं में केंद्रीय सहायता समाप्त कर दी है, इससे राज्य को प्रतिवर्ष 450 करोड़ के नुकसान की आशंका है। विपक्ष ने आबाद किए गए छह गांवों के नाम मांगे तो वह सूची उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। मंत्री ने बताया कि यह सूची बाद में उपलब्ध करवा दी जाएगी।