हरिद्वार में भी हो सकता है मुज्जफरनगर जैसा खौफनाक रेल हादसा!
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हरिद्वार में भी मुजफ्फरनगर में हुआ खौफनाक हादसा हो सकता है। जी हां, रेलवे ट्रैक की जो हालत है वो तो यही बयां कर रही है। अगर अभी ध्यान नहीं दिया तो हादसा कभी भी हो सकता है।
मुजफ्फरनगर के खतौली में हुए हादसे के बाद भी हरिद्वार क्षेत्र में भी रेलवे के अधिकारियों की नींद नहीं टूटी है। रेलवे ट्रैक के कई नट ढीले पड़े हुए हैं तो कहीं नट ही निकले हुए हैं। ट्रैक को जोड़ने वाले ज्वाइंट भी ढीले पड़ चुके हैं।
शनिवार को खतौली में हुआ हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस में कई लोगों की जाने चली गई। पिछले कई सालों में उत्तर भारत का बड़ा रेलवे का हादसा है। खतौली में हुआ हादसे में रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है। इतनी बड़ी चूक होने के बाद भी हरिद्वार का रेलवे प्रशासन सजीदा नहीं दिखाई दे रहा है।
कई जगह ऐसी है, जहां रेलवे ट्रैकों के नट बोल्ट गायब है। हरिद्वार रेलवे प्रशासन घटना के बाद भी संजीदा नहीं दिख रहा है। जबकि इससे दो दिन पहले ही लक्सर में मालगाड़ी पटरी से उतरी थी। हरिद्वार में भी इससे पहले इस तरह की घटना हो चुकी है।
सपोटर के कुंडे भी निकल चुके
बीते वर्ष ज्वालापुर में पटरी से इंजन उतर गया था। तीन वर्ष पूर्व मोतीचूर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक से ट्रेन के दो कोच नीचे उतर गए थे। उस समय भी रेलवे की लापरवाही सामने आई थी। अब इतने बड़ी घटना होने के बाद भी अधिकारी नींद में हैं। यात्रियों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
इतना ही नहीं पटरी को नीचे से कसने वाले सपोटर के कुंडे भी निकल चुके हैं। जिससे पटरी की नीचे की सपोट भी कम हो सकती है। उधर मोतीचूर के पास रेलवे ट्रेक के नट गलने लगे हैं। इतना ही नहीं दो पटरी के जोड़ भी अधिक गैप दिखाई दे रहा है।
इन दिनों कोई कर्मचारी रेलवे ट्रेक की मरम्मत करते या पेट्रोलिंग करते नहीं दिखाई दे रहे है। मुरादाबाद मंडल के डीआएम एके सिंघल की माने तो समय समय पर कर्मचारियों को लाइन की देखरेख के लिए भेजा जाता है। कहीं ऐसी कोई कमी है तो तत्काल ठीक कराया जाएगा।