गंगा में खनन को लेकर फिर सामने आया मातृसदन, अनशन की तैयारी
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मातृसदन ने आरोप लगाया है कि सरकार गंगा में खनन को लेकर भ्रम फैला रही है। साथ ही दावा किया कि हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद गंगा में खनन नहीं हो सकता।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे दिया है, जबकि गंगा में खनन हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही बंद चला रहा है। दूसरा कारण यह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण संरक्षण की धारा-5 लागू की गई है। जिसके तहत गंगा के पांच किलोमीटर के दायरे में कोई भी खनन गतिविधि संचालित नहीं हो सकती।
प्रदेश में अतिक्रमण और यूपी उत्तराखंड संपत्ति के बंटवारे को लेकर हाईकोर्ट में मोहम्मद सलीम बनाम राज्य सरकार के नाम से एक जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गंगा में खनन पर भी रोक लगा दी थी। राज्य सरकार और खनन समर्थकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। जिस पर सर्वोच्च अदालत ने स्टे दे दिया है।
मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि गंगा में खनन दो जून 2015 के पहले से बंद है। जबकि हाईकोर्ट का आदेश कुछ ससम महीने पहले आया है। इसके साथ ही सीपीसीबी ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-5 लागू की है।
जिसके तहत गंगा में खनन पर रोक लगाने के साथ ही पांच किलोमीटर के दायरे में क्रशिंग गतिविधियां भी पूरी तरह प्रतिबंधित की गई है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद गंगा में खनन नहीं किया जा सकता है।
ब्रह्मचारी दयानंद ने आरोप लगाया कि सरकार खनन माफिया को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भ्रम की स्थिति फैला रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का गलत तरीके से प्रचार किया जा रहा है, जबकि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा-5 के क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट के फैसले को सरकार छिपा रही है।
बोले शिवानंद, फिर करेंगे अनशन
सुप्रीम कोर्ट ने मातृसदन को दिया सुझाव
इस मामले में मातृसदन ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने खुद अपना पक्ष रखा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मातृसदन के पक्ष को सुनवाई में शामिल नहीं किया। कोर्ट का कहना था कि मातृसदन हाईकोर्ट के फैसले मेें पक्षकार नहीं है। साथ ही हाईकोर्ट में जनहित याचिका अतिक्रमण और संपत्ति के बंटवारे को लेकर दाखिल की गई थी।
उसमें खनन संबंधी मैटीरियल नहीं रहा। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि मातृसदन मैटीरियल जुटाकर अपना पक्ष रखे। इस पर ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि इस पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल कानूनी सलाह ली जा रही है। वहीं ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया किया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तराखंड काउंसिल अपना पक्ष ही नहीं रख पाई। सिर्फ जल संसाधन मंत्रालय ने अपनी दलील पेश की।
बोले शिवानंद, फिर करेंगे अनशन
स्वामी शिवानंद इन दिनों चारधाम दर्शन पर गए हैं। दूरभाष पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के स्टे की गलत व्याख्या कर यदि खनन माफिया से सांठगांठ कर गंगा में खनन की साजिश रचती है तो मातृसदन को फिर अनशन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस बाबत एक चिट्ठी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी भेज दी गई है। जिसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार किसी का अधिकार नहीं हो सकता है। सरकार खनन माफिया के साथ मिलकर गंगा का चीरहरण करना चाहती है। जबकि उच्च न्यायालय ने गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया है। ऐसे में मातृसदन ऐसा कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।