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उत्तराखंड: घर पहुंचा शहीद संदीप का पार्थिव शरीर, अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग

Mon, 19 Aug 2019 08:40 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 19 Aug 2019 08:40 AM IST
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Martyr Sandeep dead body reached uttarakhand died in ceasefire violation by pakistan
शहीद संदीप की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला

जम्मू कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में शहीद हुए देहरादून के लाल संदीप थापा का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा दोपहर डेढ़ बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुंचा। खराब मौसम के कारण सेना के हेलीकॉप्टर को यहां पहुंचने में देरी हुई।

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सेना के जवान, परिजन और अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर उनके पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके घर सहसपुर भेजा गया। यहां से प्रेमनगर स्थित घाट पर अंतिम संस्कार के लिए उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।

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शहादत की खबर सुनकर मच गया कोहराम

शनिवार दोपहर 2:30 बजे लांसनायक संदीप थापा के शहीद होने की खबर से सेलाकुई के राजावाला इलाके में कोहराम मच गया। मोहल्ले का हर शख्स बदहवास हालात में संदीप के घर की ओर भागा जा रहा था। संदीप के घर में चारों ओर चीख पुकार मची थी। पूर्व हवलदार पिता भगवान सिंह परिजनों को संभालने के लिए खुद आंसू पी गए। 

संदीप थापा 3/5 गोरखा राइफल में लांसनायक के पद पर तैनात थे। वर्तमान में उनकी तैनाती राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में थी। संदीप मूलरूप से ग्राम पौंडवाला राजावाला सेलाकुई के रहने वाले थे। शनिवार को संदीप के शहीद होने की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। 

बता दें, शनिवार सुबह 6:30 बजे पाक की ओर से राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में भारी शेलिंग की गई जिसका जवाब देते हुए लांस नायक संदीप थापा घायल हो गए थे। इलाज के लिए संदीप को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उपचार के दौरान वे शहीद हो गए थे। 

वर्ष 2004 में सेना में हुए थे शामिल
शहीद संदीप थापा 33 वर्ष के थे। वर्ष 2004 में संदीप भारतीय सेना में शामिल हुए थे। बीते जून में संदीप आखिरी बार अपने घर आए थे। इसके बाद से उनके परिवार का उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। वर्ष 2012 में संदीप का विवाह दूधली, डोईवाला निवासी निशा थापा के साथ हुआ था। उनका तीन साल का बेटा भी है। संदीप थापा के छोटे भाई नवीन थापा भी उक्त बटालियन में राजौरी में तैनात हैं।  

शहीद के पिता बोले- सरकार पाकिस्तान को दे कड़ा सबक

लांसनायक संदीप थापा की शहादत की खबर मिलते ही पिता हवलदार (सेवानिवृत्त) भगवान सिंह की आंखें भी नम हो गईं, गला भर आया। बावजूद इसके उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व था। भगवान सिंह का कहना है कि उनके बेटे ने भारत माता की सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए हैं।

फौज में भेजने के साथ ही उन्होंने अपने दोनों बेटों को भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया था। कहा कि उन्हें गर्व है कि बेटा देश के काम आया। पाकिस्तान की कायरतापूर्ण हरकत पर उनकी आंखें गुुस्से से भर आईं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को पाकिस्तान की हरकत का मुंह तोड़ जवाब देना चाहिए। 

हर बार पाकिस्तान सीजफायर उल्लंघन कर भारतीय सैनिकों के मनोबल को तोड़ना चाहता है। कब तक भारतीय परिवार अपने घरों के बेटों को ऐसी कायरतापूर्ण हरकतों में खोते रहेंगे? भारत सरकार को पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए जिससे वह कभी भी भारत की ओर आंख उठा कर न देख सके। 

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