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LOC पर शहीद उत्तराखंड के लाल का पार्थिव शरीर आज आएगा दून

Sat, 29 Oct 2016 10:49 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 29 Oct 2016 10:49 AM IST
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martyered sandip singh rawat dead body come dehradun on saturday.
शहीद संदीप सिंह रावत - फोटो : file photo

जम्मू-कश्मीर के तंगधार में आतंकियों से मुठभेड़ के देहरादून के 23 वर्षीय जवान संदीप रावत शहीद हो गए। शनिवार सुबह उनका पार्थिव शरीर देहरादून लाया जाएगा। बेटे की शहादत सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शहीद संदीप रावत दो साल पूर्व स्पोर्ट्स कोटे से फौज में भर्ती हुए थे।

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देहरादून नवादा निवासी संदीप रावत पुत्र हरेंद्र सिंह रावत जम्मू-कश्मीर के तंगधार में बृहस्पतिवार शाम मुठभेड़ में शहीद हो गए। संदीप छह गढ़वाल राइफल में थे। संदीप की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई। इसके बाद उन्होंने ओपन स्कूल से इंटर किया। संदीप एक बेहतरीन बॉक्सर थे। खेल कोटे से दो साल पहले संदीप फौज में भर्ती हुए थे। उनके पिता हरेंद्र रावत भी सेना से रिटायर हैं और वर्तमान में दून मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं।
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शहीद के परिजनों ने बताया कि संदीप पुलिस कांस्टेबल भर्ती में भी सफल हुए थे, लेकिन उन्होंने सेना को वरीयता दी। परिजनों ने बताया कि संदीप मई में छुट्टी पर आए थे और 13 जून को वापस गए। मंगलवार को मां आशा रावत से संदीप ने फोन पर बात की। गुरुवार रात परिजनों को बेटे की शहादत कि खबर मिली। शहीद का घर मूल रूप से पौड़ी के ग्राम घोड़पाला में है। शहीद के बड़े भाई दीपक दुबई के एक होटल में काम करते हैं।

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शोक की लहर में डूबा शहीद का गांव

martyered sandip singh rawat dead body come dehradun on saturday.
शहीद संदीप सिंह रावत - फोटो : file photo

कोटद्वार। जम्मू कश्मीर के तंगधार में बुधवार को आतंकवादियों से लोहा लेते वक्त शहीद हुआ संदीप रावत मूल रूप से पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के घोड़पाल तल्ला गांव के निवासी थे। उनके शहीद होने की खबर से जहां गांव में शोक की लहर छा गई, वहीं उनकी वीरता पर ग्रामीणों को गर्व भी है।

बीरोंखाल क्षेत्र के भाजपा नेता भुवनेश पोखरियाल ने बताया कि 22 वर्षीय संदीप रावत पुत्र हरेंद्र सिंह रावत दो साल पहले ही छठवीं गढ़वाल राइफल में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। बृहस्पतिवार शाम ग्रामीणों को संदीप के शहीद होने की सूचना मिली। ग्रामीणों को जांबाज की शहादत पर गर्व है, लेकिन घटना से गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन है। बताया कि उनका परिवार अब कोटला डिफेंस कॉलोनी देहरादून में ही रह रहा है।

पैतृक गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण शहीद संदीप के अंतिम दर्शनों के लिए देहरादून पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि संदीप एक कुशल बाक्सर भी था। संदीप के शहीद होने की खबर मिलते ही परिजन और उसके सहपाठी जहां गमगीन हो उठे, वहीं उन्हें देश के लिए किए गए उसके सर्वोच्च बलिदान पर गर्व भी महसूस हो रहा है।

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