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अपनों की खातिर अच्छी नौकरी छोड़ गांव लौट आया मार्टिन

Sun, 14 Aug 2016 09:21 AM IST
निशांत खनी/अमर उजाला, हल्द्वानी
निशांत खनी/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Sun, 14 Aug 2016 09:21 AM IST
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martin left job and return to village.
vinay martin - फोटो : AmarUjala

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और नौकरी के अवसर पहाड़ों पर कम ही हैं। रोजगार और शिक्षा के लिए गांव छोड़ना मजबूरी है। लेकिन मौना गांव के विनय मार्टिन इसका अपवाद हैं। विनय मार्टिन को उनकी मिट्टी की खुशबू खींचकर गांव ले आई। मार्टिन मौना और बाना गांव में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं।

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लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद संडीला में नामी कान्वेंट स्कूल में टीचिंग की नौकरी छोड़कर मार्टिन गांव में अपनों का सुखदुख का साथी बन गए हैं। मार्टिन अपनों और अपने गांव की बेहतरी के लिए सरकारी सिस्टम से जूझ रहे हैं।
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ईसाई समुदाय के मौना और बाना गांव विकास की दृष्टि से पिछड़े हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। उत्तराखंड के बाकी गांवों की तरह यहां से भी रोजगार और शिक्षा के लिए युवाओं का शहरों को पलायन हुआ है। विनय मार्टिन भी शिक्षा के लिए गांव छोड़ने वालों में शामिल हैं, लेकिन लौटकर गांव की मिट्टी में रचने-बसने वाले वह अकेले व्यक्ति हैं।

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बेहतर जिंदगी के लिए छोड़ा गांव पर खींच लाई मिट्टी

martin left job and return to village.
vinay martin - फोटो : AmarUjala

विनय की प्रारंभिक शिक्षा सीतापुर सेक्रेड हार्ट स्कूल में हुई। इसके बाद लखनऊ के नामी क्रिश्चियन कॉलेज से बीएससी (पीसीएम ग्रुप) करने के बाद उसी कॉलेज से 1998 में एलटी किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद विनय की हरदोई के संडीला स्थित सेंट मैरी स्कूल में टीचर बन गए। अच्छी तनख्वाह के चलते सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं किया। बीच-बीच में अपनों से मिलने गांव में आते रहे।

गांव के लिए सौंप दिया पूरा जीवन
गांव की बदहाली की टीस आखिर 2008 में ऐसी बढ़ी कि मार्टिन नौकरी छोड़कर अपनों के बीच अपनों की लड़ाई के सेनानी बन गए। विनय मार्टिन की जन्मभूमि मौना है। उनके परदादा गढ़वाल से पलायन कर मौना गांव में बसे थे। अब चौथी पीढ़ी में गांव में वह और उनके भाई का परिवार है।

विनय के पिता फौजी थे, जो सेवानिवृत्ति के बाद गांव में ही समाजसेवा से जुड़ गए। विनय के चार भाइयों में दो फौज से रिटायर्ड हैं। 40 वर्षीय मार्टिन अविवाहित हैं। उन्होंने अपना जीवन गांव और अपनों को समर्पित कर दिया है। मौना और बाना में 300 से अधिक आबादी है।

अपनों के लिए राजनीति में भी आजमाई किस्मत

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panchayat - फोटो : Bureau

गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास कराने के लिए विनय मार्टिन ने राजनीति में आने का प्रयास किया। पिछले पंचायत चुनाव में प्रधानी में किस्मत आजमाई, लेकिन पंचायत के उसके समुदाय के अलावा बाहरी गांवों के वोट नहीं मिले और चुनाव हार गए। इसके बाद भी विनय का जुनून कम नहीं हुआ।

विनय ग्रामीणों के सुखदुख के साथी बनकर गांव की बेहतरी और ग्रामीणों की मदद के लिए ब्लॉक, तहसील और प्रशासनिक दफ्तरों में खुद ही दौड़भाग करते हैं। विनय कहते हैं उनका मकसद गांव की खुशहाली है। बाना स्कूल में शिक्षा मित्र में नौकरी मिल जाती तो अपनों के बीच रहकर रोजगार भी मिल जाता।

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