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उत्तराखंड की इस यूनिवर्सिटी में चल रहे थे बड़े खेल, कुलपति ने मारा छापा तो हुए कई खुलासे

Fri, 17 Nov 2017 07:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 17 Nov 2017 07:53 AM IST
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Many disturbances found in Uttarakhand Technical University
Uttarakhand technical university - फोटो : logo

उत्तराखंड की एक यूनिवर्सिटी में कई खेल चल रहे है। यह बात तब सामने आई जब कुलपति ने यहां छापा मारा। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में कितने कंप्यूटर खरीदे गए, किसको बांटे गए, क्या सामान आया, कहां गया... इसकी कोई जानकारी नहीं है। मंगलवार को जब विवि के कुलपति डॉ.उदय सिंह रावत ने छापा मारा तो सभी

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अनियमितताएं खुलकर सामने आ गईं। विवि में पीएचडी के नाम पर भी खेल चल रहा है। गढ़वाल विवि से कहीं अधिक 850 छात्र पीएचडी में पंजीकृत पाए गए हैं तो दूसरी ओर डिग्री, मार्कशीट के लिए छात्रों को परेशान करने की बात भी सामने आई है।
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कुलपति ने कुलसचिव को स्टोर की जांच के आदेश दे दिए हैं। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे कुलपति डॉ.यूएस रावत विवि पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले परीक्षा विभाग में गोपनीय कार्यों की जानकारी ली।
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यहां डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन, प्रोविजनल डिग्री के लिए छात्रों की लंबी कतार लगी थी। विवि कुलपति ने निर्देश दिए कि अब छात्रों को मार्कशीट केवल उनके कालेज में ही उपलब्ध होगी। विवि से केवल माइग्रेशन और प्रोविजनल

डिग्री ही मिलेगी। डिग्री, छात्र को या तो दीक्षांत समारोह में दी जाएगी या फिर डाक के माध्यम से उसके पते पर भेजी जाएगी। उन्होंने परीक्षा से संबंधित सभी कार्यों को सुव्यवस्थित किए जाने और तकनीकी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करने की हिदायत की।

पीएचडी का खेल देख हैरान रह गए कुलपति

Many disturbances found in Uttarakhand Technical University
Uttarakhand technical university

इसके बाद कुलपति विवि के शोध अनुभाग पहुंचे तो पीएचडी का खेल देखकर हैरान रह गए। विवि में 850 छात्र पीएचडी में पंजीकृत हैं। इतनी संख्या तो गढ़वाल विवि में भी शोधार्थियों की नहीं है। लिहाजा, कुलपति ने आदेश दिया कि

सभी छात्रों का टाइटल चेक किया जाए। पीएचडी की थिसिस  किसी भी सूरत में उत्तराखंड में चेक नहीं होगी, यह दूसरे राज्यों को भेजी जाएगी। छात्र को अपनी सिनॉपसिस ओपेन फोरम में पेश करनी होगी। यहां बैठी समिति

सिनॉपसिस को एप्रूव करेगी। छात्र का वाइवा भी सबके सामने बैठाकर होगा। वित्त विभाग में भुगतान से संबंधित प्रक्रिया को नियमानुसार सरल और सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन पेमेंट, ई-टेंडरिंग जैसी प्रक्रियाओं को समय से संपन्न कराने को कहा। वहीं, विवि के स्टोर पहुंचकर कुलपति चौंक गए। यहां कितने

कंप्यूटर खरीदे गए, कितना अन्य सामान खरीदा गया, किसको दिया गया, इसकी कोई जानकारी उपलब्ध ही नहीं थी। कुलपति ने इसे बड़े पैमाने की लापरवाही मानी। उन्होंने तत्काल विवि की कुलसचिव प्रो.अनीता राणा को जांच के निर्देश दे दिए।

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