हरिद्वार के संतों की मांगः कई अखाड़ों में भरे हैं असामाजिक तत्व, हो CBI जांच
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शंकराचार्य विवाद के बीच स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के भूमा निकेतन में हुई संतों की बैठक में कहा गया कि अनेक अखाड़ों में असामाजिक तत्व भरे हुए हैं। ऐसे में उनकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। निर्णय लिया गया कि सीबीआई जांच के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
महामंडलेश्वर प्रेमानंद महाराज की अध्यक्षता एवं प्रबोधानंद गिरि के संचालन में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अखाड़ों को स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के खिलाफ कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है।
अखाड़ों की बात कोई मानता भी नहीं। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि जूना अखाड़े के जिन महामंडलेश्वर अर्जुन पुरी को कथित रूप से निष्कासित किया गया था, उन्होंने गत दिवस भारत माता मंदिर के कार्यक्रम में न केवल भाग लिया, अपितु उन्हें सम्मानित भी किया गया।
'अखाड़ों में ऐसे बहुत लोग हैं जिन पर मुकदमें दर्ज हैं'
जबकि इस सम्मेलन में जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि भी शामिल थे। इस सम्मेलन में निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कमलानंद गिरि भी निमंत्रित किए गए। संतों ने आरोप लगाया कि अखाड़ों ने अतीत में जिन्हें पदवी दी है उनमें से अनेक गिरफ्तार हुए हैं तथा धोखाधड़ी के मुकदमें दर्ज हुए हैं।
संतों की इस बैठक में मांग की गई कि सभी अखाड़ों के पदाधिकारियों की जांच सीबीआई से कराई जाए। अनेक अखाड़ों में असामाजिक तत्व भरे हुए है। निर्णय लिया गया कि संत समाज उच्च न्यायालय में जांच के लिए याचिका दायर करेगा। स्वामी महेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अखाड़ों में करोड़ों रुपये लेकर पद बांटे जाते हैं।
वसूले गए धन का समाज और धर्म के लिए कोई उपयोग नहीं किया जाता। सभी संतों ने एक सुर से शंकराचार्य पद पर आसीन स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को मान्य करार दिया। आग्रह किया गया कि संत समाज तथा खुद अखाड़ा परिषद उन्हें आमंत्रित कर उनका अभिनंदन करें। बैठक में स्वामी सत्यव्रतानंद, ब्रह्मचारी गोपाल दत, स्वामी रामानंद, स्वामी सुरेशानंद, स्वामी विनोद महाराज आदि उपस्थित थे।