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शार्प शूटर लखपत ने एक और तेंदुए को किया ढेर, अब तक 53 आदमखोर का कर चुका शिकार

Wed, 26 Dec 2018 09:59 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा)
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 26 Dec 2018 09:59 AM IST
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Maneater Leopard killed by sharp shooter lakhpat in Almora
लखपत ने तेंदुए को किया ढेर

आदमखोर तेंदुआ सोमवार शाम करीब चार बजे गोविंदी के घर के आसपास भी देखा गया था। तेंदुए से आतंकित गांव के लोगों ने उस समय गांव में शिकारियों के न होने पर नाराजगी भी जताई थी। लोगों का कहना था कि अगर गांव में शिकारी मौजूद होते तो तेंदुआ सोमवार को ही ढेर हो जाता। 

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लखपत अभी तक 53 तेंदुओं का शिकार कर चुके हैं। इस साल यह उनका चौथा शिकार है। लखपत की कहानी यह बताने के लिए पर्याप्त है कि पहाड़ में वन्य जीवों की समस्या किस कदर बढ़ती जा रही है। प्रधान राधिका देवी, मोहन राम, धनसिंह, आनंद सिंह, गीता जोशी, गोपाल सिंह, डूंगर सिंह, दिनेश जोशी, सूरज प्रकाश, मदन राम, चंदन किरौला, दीप चंद्र आदि ने बैठक की और गांव में शिकारियों को दिन में भी तैनात करने की मांग की।
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बाद में इन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से बात की। बाद में वन विभाग कर्मियों के साथ हुई बातचीत में तय हुआ की संबंधित कर्मी व कुछ शिकारी दिन में भी गश्त करेंगे। वन विभाग के प्रतिनिधि खुशाल सिंह अटवाल ने लोगों को बताया गया कि वन विभाग ने ट्रेंकुलाइजर टीम के भुवन टम्टा, पंकज भाकुनी, त्रिभुवन उपाध्याय, चंद्रशेखर त्रिपाठी आदि को भी अभियान पर लगाया है।
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गोविंदी देवी के पुत्र ललित मोहन जोशी ने बताया कि प्रशासन तथा वन विभाग द्वारा अब तक की गई कार्रवाई से वे संतुष्ट हैं। सोमवार की शाम शिकारी गांव में मौजूद होते तो तेंदुआ उसी समय मारा जाता। लोगों में इसी बात की नाराजगी रही।
 

रात भर की गश्त, दिखाई नहीं दिया तेंदुआ

शिकारी लखपत सिंह रावत ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे अजय रावत के साथ सोमवार की रात करीब दस किलोमीटर के दायरे में सर्च लाईट के साथ गश्त की पर कहीं भी तेंदुआ दिखाई नहीं दिया। तेंदुए के पांव के निशान भी नहीं मिल पाए हैं। लखपत ने मंगलवार को गांव के दूसरे छोर पर गश्त करने की योजना बनाई थी। लखपत का पूरा फोकस गश्त पर ही था और उन्होंने  मचान नही बनाया था। एक अन्य शिकारी ने कुत्ते को भी साथ लेकर गश्त की थी। अन्य शिकारी मंगलवार से पूरी तरह से मोर्चा संभालने की तैयारी में थे।

खराब स्वास्थ्य के चलते बना आदमखोर
चौखुटिया। शिकारियों के मुताबिक क्षेत्र में अभी तक किसी दूसरे तेंदुए की सक्रियता के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि यह वही तेंदुआ है जिसने एक हफ्ते में इस क्षेत्र में दो शिकार किए। लखपत का मानना है कि खराब स्वास्थ्य के कारण यह तेंदुआ आदमखोर बना। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पुख्ता हो पाएगा कि इस तेंदुए के आदमखोर बनने के पीछे क्या कारण थे। तेंदुए के गले में संक्रमण और घाव बता रहा है कि तेंदुआ की सेहत नाजुक हो गई थी।

अब तक ये हुए तेंदुए के शिकार....

31 दिसंबर 2014 को दैरती के तोक पीनबगड़ में एक मजदूर चेतराम को मारा था
26 फरवरी 2015 को उलेणी गांव में 96 साल की कलावती पांडे को
8 फरवरी 2016 में महलचौरा निवासी भूपाल सिंह को
10 फरवरी 2016 को चितेली में तारा सिंह को
17 दिसंबर 2018 को सीमापानी में हीरा देवी उर्फ हेमा
23 दिसंबर 2018 को बमनगांव में गोविंदी को

-क्षेत्र में यह तीसरा तेंदुआ जो शिकारी की गोली का निशाना बना
-महलचौरा क्षेत्र में 20169 में सक्रिय तेंदुए को लखपत ने ही मारा था।
-इससे कई साल पहले सिमलखेत में भी एक तेंदुआ मारा गया था।

इस साल लखपत का यह चौथा शिकार
16 जून, 2018  को हरीनगरी बागेश्वर
26 सितंबर 2018 को हवलबाग, मैनुली
12 अक्टूबर 2018 को बागेश्वर बाजार, केमू स्टेशन के निकट
25 दिसंबर 2018 सीमापानी में

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