आमने-सामने की खौफनाक लड़ाई में तेंदुए को मार भगाया
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दिल्ली के चिड़ियाघर में बाघ ने एक किशोर को भले मार दिया पर उत्तराखंड के केवलानंद की हिम्मत के आगे तेंदुए को हार माननी पड़ी। ऊपरी रामगंगा घाटी के लेजम ग्राम पंचायत के कमद गांव में बुधवार की रात घर के अंदर घुसा तेंदुआ केवलानंद की हिम्मत देख कर पस्त हो गया। पंद्रह मिनट की आमने सामने की लड़ाई के बाद आखिर तेंदुए ने दुम दबाकर भागने में ही भलाई समझी।
दोनों के बीच हुई गुत्थमगुत्था के दौरान युवक का एक हाथ तेंदुए के मुंह में चला गया। कई जगहों पर गहरे जख्म और लहूलुहान होने पर भी वह 15 मिनट तक जूझता रहा।
घर में मची चीख-पुकार सुनकर जब तक लोग वहां पहुंचे, तब तक तेंदुआ भाग खड़ा हुआ। दरअसल, कुत्ते का पीछा करते हुए तेंदुआ उसके घर में घुस गया था।
कुत्ते का पीछा करते घर में घुसा तेंदुआ
केवलानंद के मुताबिक बुधवार रात लघुशंका के लिए उनकी माता आनंदी देवी घर से बाहर निकली थीं। घर में आने के दौरान उनके साथ कुत्ता चल दिया। उस कुत्ते का शिकार करने के लिए उसके पीछे-पीछे तेंदुआ भी घर के अंदर चला आया।
तेंदुए के अंदर घुसते ही बेहद खौफनाक स्थिति हो गई। केवलानंद तिवारी (30) के साथ तीन छोटे बच्चे अरुण, तरुण, दिवाकर सोए थे और तेंदुआ इन लोगों से सिर्फ दो फीट की दूरी पर आकर खड़ा हो गया और बच्चों पर झपटने का प्रयास करने लगा।
केवलानंद ने अपनी जान की कोई परवाह नहीं की और बच्चों को तेंदुए के हमले से बचाने के लिए उसे भगाने का प्रयास करने लगा। आमने सामने की लड़ाई में तेंदुए के खूनी पंजे से निपटने केवलानंद के पास कोई हथियार भी नहीं था।
तेंदुए ने मुंह में लिया हाथ, फिर भी लड़ता रहा
खूंखार तेंदुए ने केवलानंद का बांया हाथ अपने मुंह ले लिया। फिर भी केवलानंद ने हिम्मत नहीं हारी, वह तब तक तेंदुए से भिड़ता रहा जब तक वह घर से बाहर नहीं निकल गया।
तेंदुए से केवलानंद को लड़ता देखकर घर के अंदर तीन बच्चों, केवलानंद की पत्नी हेमा तिवारी, माता आनंदी देवी में चीख पुकार मच गई। हल्ला सुनकर गांव के अन्य लोग भी पहुंच गए, लेकिन तेंदुआ भाग चुका था।
गंभीर रूप से घायल केवलानंद को गोचर अस्पताल में भर्ती किया गया है। उसके पैर, पीठ और हाथ में गहरे जख्म हो गए हैं। मजदूरी कर परिवार को पालने वाले केवलानंद ने बताया कि तेंदुआ काफी बड़ा है और वह खूंखार तरीके से हमला कर रहा था।
घाटी के 118 गांव में तेंदुओं का आंतक
केवलानंद रात की घटना के बाद से अब तक सामान्य नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि यदि साहस नहीं दिखाता तो बड़ी अनहोनी हो जाती।
तेंदुए का हमला रोज नए गांव में हो रहा है। ऊपरी रामगंगा घाटी के 118 गांव ऐसे हो गए हैं, जहां तेंदुए अपनी पहुंच बना चुके हैं।
लोगों को आशंका है कि इस इलाके में सक्रिय तेंदुओं की संख्या तीन-चार भी हो सकती है। लोगों का आरोप है कि वन विभाग को इन घटनाओं की कोई परवाह नहीं है। हालत यह हो गई है कि अब तो घटना होने पर भी वनकर्मी मौके पर नहीं जा रहे हैं।