महा कुंभ 2021 : 40 दिन का होगा कुंभ मेले का पर्वकाल, पांच अप्रैल को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे गुरू
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भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि पांच अप्रैल से पहले कुंभ का कोई भी स्नान पर्व नहीं है। महाशिवरात्रि के दिन एक स्नान होता है। पूर्वकाल में चौदह जनवरी से शुरू होने वाले कुंभ स्नान इस बार नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि सूर्य के मेष और गुरु के कुंभ राशि में आने पर ही हरिद्वार का कुंभ होता है।
2021 में गुरु का कुंभ राशि में प्रवेश पांच अप्रैल से पहले नहीं होगा। इस कारण कुंभ के कथित रूप से घोषित अन्य स्नानों को अखाड़ा परिषद ने भी अमान्य कर दिया है। जब तक गुरु का प्रवेश कुंभ में न हो तब तक कोई भी पर्व कुंभ स्नान नहीं कहा जा सकता।
सूर्य का मेष राशि में प्रवेश एक महीने चलेगा
डॉ. मिश्रपुरी ने बताया कि सूर्य का मेष राशि में प्रवेश एक महीने चलेगा। भगवान सूर्य पंद्रह मई को मेष राशि से निकल जाएंगे। उसी के साथ कुंभ का चालीस दिन का पर्वकाल भी समाप्त हो जाएगा। इन चालीस दिनों में जो भी स्नान पर्व पड़ेंगे, उन्हें कुंभ का स्नान कहा जा सकता है।
कोरोना को देखते हुए कुंभ का स्वरूप नए सिरे से निर्धारित किया जा रहा है। इस संबंध में अखाड़ा परिषद ने ज्योतिषशास्त्र के ज्ञाताओं से भी जानकारियां ली है। सभी ने यह स्पष्ट किया है कि जब तक कुंभ राशि में बृहस्पति नहीं आएंगे, कुंभ का कोई स्नान मान्य नहीं होगा।
अलबत्ता संन्यासियों में भगवान शिव की महारात्रि के दिन स्नान करने की परंपरा है। परिणामस्वरुप 11 मार्च महाशिवरात्रि के दिन एक स्नान का आयोजन किया जाएगा। कुंभ मेला काल भले ही एक जनवरी से प्रारंभ हो जाएगा, लेकिन कुंभ का पर्वकाल पांच अप्रैल से पूर्व प्रारंभ नहीं होगा।