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मैग्सेसे अवॉर्डः अंशू गुप्ता का उत्तराखंड से है गहरा नाता

Fri, 31 Jul 2015 12:58 PM IST
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत)
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत) Updated Fri, 31 Jul 2015 12:58 PM IST
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magsaysay award anshu gupta childhood story.

प्रतिष्ठित मैग्सेसे अवॉर्ड-2015 के लिए चुने गए अंशू गुप्ता का संबंध उत्तराखंड से भी रहा है। उन्होंने वर्ष 1985 में हाईस्कूल की पढ़ाई बनबसा के शारदा इंटर कॉलेज से की है। हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए अंशू गुप्ता के पिता स्व. एसडी गुप्ता यहां सैनिक छावनी में एमईएस में अधिकारी थे।

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एशिया का ‘नोबेल प्राइज’ कहा जाने वाला मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए अंशू गुप्ता के चयनित होने पर उनके प्रधानाचार्य, शिक्षक और मित्र खासे गदगद हैं। हाईस्कूल के बाद 11वीं की पढ़ाई टनकपुर स्थित राधेहरि राजकीय इंटर कॉलेज में की। इसके बाद उनके पिता का देहरादून स्थानांतरण हो गया था।
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उन्होंने वर्ष 1983 से 1986 तक का समय यहां बिताया था। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्रधानाचार्य बंशीधर उपाध्याय बताते हैं कि अंशू मेधावी, होनहार और योग्य छात्र था और उसकी हैंड राइटिंग भी काफी अच्छी थी। कुशल मंच संचालक और डिबेटर छात्र की इस उपलब्धि ने स्कूल का भी मान बढ़ाया है।

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स्कूल के समय से ही था जनसेवा का भाव

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इसी तरह अंशू गुप्ता के छोटे भाई आशू गुप्ता के साथ पढ़े और अंशू से एक कक्षा जूनियर देवभूमि बीएड कॉलेज के निदेशक कैलाश थपलियाल बताते हैं कि पढ़ाई में मेधावी होने के साथ अन्य गतिविधियों में भी उन्हें महारथ हासिल थी।

जनसेवा का भाव उनमें स्कूल के समय से ही नजर आता था। सौम्य और गंभीर स्वभाव के धनी अंशु अपने शिक्षकों और मित्रों के हमेशा प्रिय रहे। शारदा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य करन सिंह कहते हैं कि मैग्सेसे अवॉर्ड के लिए अंशू के चयनित होने से शारदा इंटर कॉलेज का भी नाम रोशन हुआ है।

आपदा पीड़ितों के लिए कर रहे हैं कार्य
मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले अंशू गुप्ता ने पढ़ाई के बाद कॉरपोरेट जगत में बड़ी नौकरियां करने के बाद समाजसेवा को चुना।

गूंज फाउंडेशन नाम से बनाई संस्था ने लोगों से पुराने कपड़े लेकर जरूरतमंदों में बांटने का कार्य किया। वे लंबे समय से आपदा पीड़ितों के तन ढकने का जरिया बने हुए हैं।

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