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कैसे बनती है मैजिक ब्रिक? जानने के लिए पढ़ें...

Thu, 16 Oct 2014 09:14 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 16 Oct 2014 09:14 PM IST
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magic brick.

भूकंपरोधी मैजिक ब्रिक कोयले की राख से बनती है। आपदा से तबाह केदारनाथ में भी इस ब्रिक से निमार्ण कार्य किया जा रहा है। इन दिनों यह ब्रिक उत्तराखंड वासियों को खूब भा रही है। आइए जानते हैं कैसे बनती है यह मैजिक ब्रिक...

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ये मैजिक ब्रिक्स फ्लाई एश से ओवन में बनाई जाती है, ओवन में ही यह फूलती है। इसमें एयर होती है। बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कोयले से जो राख निकलती है, उसको ही फ्लाई एश कहा जाता है और उससे ही यह ब्रिक्स तैयार की जाती हैं।
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मैजिक्रिट बिल्डिंग सोल्युशन प्राइवेट लिमिटेड के उत्तराखंड मार्केटिंग हैड गुरप्रीत सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में यह कांसेप्ट उनकी कंपनी ही लेकर आई है। बताया कि फिल्हाल इसका प्लांट झज्जर हरियाणा में हैं। वहीं से यह ब्रिक्स लाई जा रही हैं।
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यह ब्रिक घर के तापमान को भी नियत रखती है। खासकर आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए इस ब्रिक को यहां लाया गया है। इन दिनों परेड ग्राउंड में लगे ट्रेड फेयर में मैजिक ब्रिक की स्टॉल पर लोगों की भीड़ लगी हुई है।

आमतौर पर आपने जो ईंट देखी है, वो इतनी खूबियों से भरी नहीं होती, जितनी इस मैजिक ब्रिक में है। इस ब्रिक में मिट्टी इस्तेमाल नहीं होने की वजह से दीमक नहीं लगती। हल्की होने के कारण भूकंप के झटके को झेल लेती है और एकदम से नहीं गिरती।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए खास

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हल्की, सस्ती और भूकंपरोधी होने के साथ ही यह ईट पानी में भी तैरती है। हल्की होने की वजह से यह ईंट आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष तौर पर लाई गई हैं। यानी जहां एक हजार ईट किसी ट्रक या गाड़ी से पहाड़ों में यदि भेजी जाएं तो यह उसकी तुलना में दोगुनी यानी दो हजार ईंट ले जाई जा सकती हैं।

वहीं खच्चर भी एक बार में दोगुनी संख्या में ईंट ढोकर ले जा सकता है। यानी ईंट तो सस्ती है ही साथ में इसे ले जाने वाला समय और खर्च भी आधा होगा। वहीं हल्की होने की वजह से इससे बाकि तरह के बचाव भी संभव हैं।

केदारनाथ में भी इन ईटों से बनाए जा रहे भवन
इस ईट के बनाए भवनों में पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। पानी नहीं पड़ने से मकान का सरिया, बजरी, रेत सब सुरक्षित रहता है। इस दीवार से आवाज आर-पार नहीं जाती।

इस ब्रिक को आरी और टायल कटर से भी काटा जा सकता है। इस ब्रिक को चिपकाने के लिए मैजिक बांड पॉलीमर बेस्ड का इस्तेमाल किया जाता है।

जिससे एक ही दिन में ब्रिक्स चिपक जाती हैं और कमरा तैयार हो जाता है। इस ब्रिक्स में तराई की जरूरत नहीं होती है। फिलहाल केदारनाथ में इन ईटों से भवन बनाए जा रहे हैं।

ऐसे आता है खर्च कम

magic brick.

दस फुट बाई दस फुट की दीवार
ईट - एक की कीमत - कुल खर्च
लाल वाली ईंट - 5.50रु - 2,750रु
2.5 बैग सीमेंट - 350रु - 900रु
दस बैग रेत - 100रु - 1000 रु
टोटल - 4,650रु

अंडोलाइन शीट्स से नहीं आएगी बारिश की आवाज
अब आपके घर के लिए टीन की जगह बीटोमीन सेल्युलेट की बनी आंडोलाइन शीट्स आ गई है। जो देखने में तो बेहद आकर्षक है ही साथ में कई तरह की खूबियों से भी भरपूर है।

कलरफुल होने के साथ ही इस शीट की खासियत है कि बाहर बारिश होने के बावजूद आपके घर में पानी की आवाज नहीं आएगी। यह वजन में भी टीन के मुकाबले आधी हैं। हालांकि कीमत में दस से पंद्रह रुपए का अंतर है।

यह टीन की शीट्स से महंगी है। बोन क्रिएशन के नमन कुमार ने बताया कि यह फ्रांस की तकनीक और फिलहाल भारत में बैंगलोर में इसका ऑफिस है।

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