यहां देवी मां को देखने से अंधे हो जाते हैं भक्त
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उत्तराखंड के नैनीताल जिले से लगे पाटी विकासखंड के देवीधुरा में स्थित मां बाराही धाम अटूट आस्था का केंद्र है।
आषाढ़ी सावन शुक्ल पक्ष में यहां गहड़वाल, चम्याल, वालिक और लमगड़िया खामों के बीच बग्वाल (पत्थरमार युद्ध) होती है। यहां पर देवी को खुले नेत्रों से नहीं देखने की परंपरा है।
मान्यता है कि खुली आंखों से देखने वाला अंधा हो जाता है। इसी कारण देवी की मूर्ति को ताम्रपेटिका में रखा जाता है।
सिर्फ वार्षिक पूजा के मौके पर देवी का पूजन और श्रृंगार भी आंखों में काली पट्टी बांधकर किया जाता है। 12वीं सदी में स्थापित इस मंदिर में चैत्रीय तथा अश्विन नवरात्रों में देवी के उपासकों की भारी भीड़ उमड़ती है।
देवी दर्शन से दूर होते हैं सभी कष्ट
मान्यता है कि यहां देवी दर्शन करने से हर कष्ट दूर होता है। देवीधुरा का समूचा क्षेत्र मां बाराही को ईष्ट देवी मानता है।
पुराणों में मां वज्र बाराही का चूड़ामणि ग्रंथ में उल्लेख है। इसी कारण यहां हर साल देश भर से श्रृद्घालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में स्थित है।
हर साल रक्षाबंधन के मौके पर मां बाराही धाम में बग्वाल मेला आयोजित है, जिसमें श्रृद्घालु दो समूह में बटकर एक दूसरे पर पत्थरों से वार करते हैं।
उत्तराखंड के चंपावत जिले में मौजूद इस मंदिर में छोटी-बड़ी हजारों घंटियां देख सकते हैं। हर साल आयोजित होने वाला यह मेला लोगों में मां बाराही के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है।