फरार प्रेमी जोड़े को पकड़ा तो मुश्किल में 'पुलिस'
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देहरादून नेहरू कॉलोनी थाने में पकड़कर लाए गए प्रेमी ने जहर का सेवन कर खुदकुशी का प्रयास किया। अफरातफरी के बीच पुलिस उसे दून अस्पताल ले आई।
खतरे से बाहर होने पर पुलिस की जान में जान आई। तलाशी में प्रेमिका के पास से भी जहरीला पदार्थ मिला। पुलिस का कहना है कि दोनों परिवार शादी के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन लड़की पक्ष बालिग होने तक का इंतजार करने की बात कह रहा था।
डालनवाला के पूर्ण बस्ती निवासी अविनाश का नेहरू कॉलोनी की एक छात्रा से काफी समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। दोनों ने एक दूसरे को जीवन साथी चुनकर पांच जून को प्रेम विवाह कर लिया था। 18 जून को उनकी शादी का रजिस्ट्रेशन हो गया था।
22 जून को युगल घर से फरार हो गया था। दोनों परिवारों ने उन्हें ढूंढने का काफी प्रयास किया, लेकिन सुराग नहीं लगा। एक जुलाई को छात्रा की मां ने नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोप में अविनाश के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में मामला दर्ज करा दिया।
इसी बीच सोमवार को पता चला कि दोनों लक्खी बाग इलाके में रह रहे हैं। रात में पुलिस परिजनों की मदद से उन दोनों को लेकर नेहरू कॉलोनी थाने आ गई। यहां पुलिस की मौजूदगी में लड़का और लड़की पक्ष के लोग बात करने लगे। लड़की पक्ष ने बेटी के नाबालिग होने के कारण फिलहाल शादी की बात से इनकार कर दिया।
सही नहीं उम्र का सर्टिफिकेट
प्रेमिका से जुदा होने के डर से अविनाश ने जहर का सेवन कर लिया। परिजनों की नजर पड़ी तो उसके मुंह से आधे से अधिक पदार्थ बाहर निकाल दिया। पुलिस उसे दून अस्पताल ले आई। चिकित्सकों के उसकी हालत खतरे से बाहर बताने पर पुलिस की जान पर जान आई।
लड़की के पास से भी जहरीला पदार्थ बरामद हुआ है। रात में ही पुलिस अधिकारी थाने पहुंच गए। पुलिस ने रात में ही लड़की को उसके परिजनों के सुपुर्द कर घर भेज दिया। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद अविनाश को फिलहाल परिजनों के हवाले कर दिया है। अविनाश एक ड्राईक्लीनर की दुकान पर काम करता है।
शादी के रजिस्ट्रेशन में छात्रा को बालिग बताते हुए नगर निगम की तरफ उम्र का सर्टिफिकेट लगाया गया है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि प्रथमदृष्टया यह प्रमाण पत्र सही नहीं पाया गया है। छात्रा के 164 के बयान दर्ज कराए जाएंगे। उसके बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
पुलिस की घोर लापरवाही
थाने में आने के बाद भी पुलिस ने प्रेमी-युगल की तलाशी लेने की जरूरत महसूस नहीं की, जबकि दोनों एक दूसरे के साथ जीने और मरने की बात पर अड़े थे। नियमानुसार थाने लाने वालों की सबसे पहले तलाशी ली जाती है। यदि पहले उनकी तलाशी हो जाती तो कम से कम इस तरह की घटना को टाला जा सकता था।