उत्तराखंड: रुड़की जेल में लूट के आरोपी ने लगाई फांसी, पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
रुड़की उपकारागार में लूट के मामले में बंद एक आरोपी के पेड़ पर फंदा लगाकर जान देने का मामला सामने आया है। घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में बंदी को सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मृतक के परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। इस हादसे ने जेल प्रशासन पर सवालिया निशान लगा दिया है। इस हादसे से पहले भी जेल प्रशासन की लापरवाही सामने आ चुकी है।
मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में 28 अक्टूबर को गाजियाबाद के कविनगर निवासी कन्हैया कुमार के साथ तीन युवकों ने लिफ्ट देने के बहाने दस हजार रुपये और मोबाइल लूट लिया था। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि एक आरोपी दीपक पुत्र कुंडू निवासी ग्राम लिब्बरहेड़ी फरार हो गया था।
पुलिस ने 30 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर रुड़की जेल में भेजा था। इस बीच आरोपी ने पुलिस गिरफ्तारी से पहले खुद को चाकू मारकर लहूलुहान कर लिया था। पुलिस ने उसका उपचार कराया था।
पेड़ पर कपड़े का फंदा बनाकर खुद को फांसी
तभी से वह रुड़की जेल में बंद था और जेल अस्पताल में ही उसका उपचार चल रहा था। जेल में जाने के बाद से ही वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। बृहस्पतिवार को जेल अस्पताल के बाहर दीपक ने एक आम के पेड़ पर कपड़े का फंदा बनाकर खुद को फांसी लगा ली।
उसे फंदे पर लटका देख जेल कर्मचारियों के होश उड़ गए। जेल प्रशासन की ओर से सूचना गंगनहर कोतवाली पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी राजेश साह मौके पर पहुंचे और जानकारी ली।
पुलिस उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची। यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलते ही परिजन सिविल अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया दिया है।
हादसे के कारणों की जांच शुरु
गंगनहर कोतवाली प्रभारी राजेश साह ने बताया कि दीपक ने फांसी किन कारणों से लगाई है, इसकी जांच की जा रही है। उधर, जेलर जेपी द्विवेदी ने बताया कि लूट के मामले में बंद दीपक ने पेड़ पर फंदे से लटककर फांसी लगाई थी। जिसे तत्काल सिविल अस्पताल जेल की एंबुलेंस से भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फांसी लगाने के कारणों का पता नहीं लग पाया है।
इन सवालों में घिरा जेल प्रशासन
इस मामले के बाद जेल प्रशासन की एक बार बड़ी लापरवाही सामने आई है। जेल में बंद दीपक का जेल अस्पताल में ही उपचार चल रहा था। चिकित्सक भी उसका लगातार उपचार कर रहे थे। इस बीच उसकी सुरक्षा में कर्मचारियों को भी लगाया गया था। अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिस समय दीपक ने जेल परिसर में खड़े आम के पेड़ पर फांसी लगाई, उस समय कर्मचारी कहां थे। इस बाबत जेलर का कहना है कि अस्पताल जेल बैरक परिसर से बाहर है। जिसके चलते कर्मचारी उस पर नजर नहीं रख पाए।
पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
रुड़की उपकारागार में जेल प्रशासन की यह पहली चूक नहीं है। इससे पहले भी कई लापरवाही सामने आ चुकी है। पूर्व में चमोली जेलर के सरकारी आवास में चोरों ने सेंधमारी की थी। चोर चमोली जेलर के घर के जेवर व नकदी लेकर फरार हो गए थे। इसके अलावा जेल परिसर में बंदियों के भूख हड़ताल करने और बंदी फरार होने समेत कई मामले हो चुके हैं।
मेरे बेटे को गांव के लोगों ने फंसाया
दीपक की मां बुधवार को अपने बेटे से मिलने जेल मेें आई थी। इस दौरान मृतक की मां जेल के गेट पर बैठकर रो रही थी। चश्मदीदों का कहना है कि मृतक की मां बार-बार कह रही थी कि उसके बेटे ने लूट की किसी वारदात अंजाम नहीं दिया है। गांव के कुछ लोगों ने उसे फंसाकर जेल भिजवा दिया है। उधर, दीपक की मां को रोता देख लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। लोगों ने समझाकर-बुझाकर किसी तरह उसे वापस घर भेजा था।
रुड़की उपकारागार में बंदी के फांसी लगाने की सूचना मिली है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। अगर जेलर या किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की मजिस्ट्रेयिल जांच करवाई जाएगी।
-डॉ. पीवी के प्रसाद, आईजी जेल