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महासंग्राम 2019: इस गांव में सांसद तो क्या प्रत्याशी भी नहीं पहुंचते वोट मांगने, पीछे है ये वजह

Mon, 25 Mar 2019 03:00 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 25 Mar 2019 03:00 AM IST
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Lok sabha elections 2019 No political leader reached in this uttarakhand village
उत्तराखंड का मानिक गांव - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

इसे तीसरी दुनिया ही कहेंगे क्योंकि देवभूमि के इस गांव में आज तक चलकर कोई सरकार नहीं पहुंची। पिथौरागढ़ स्थित नामिक गांव पहुंचने के लिए खड़ी चढ़ाई का ही सबब है कि 1952 से अब तक 124 परिवार और 407 मतदाताओं वाले नामिक गांव में सांसद तो दूर वोट मांगने के लिए कोई प्रत्याशी भी नहीं पहुंचा। 

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समुद्र तल से करीब 2700 मीटर की ऊंचाई में नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक गांव में 206 पुरुष और 201 महिला मतदाता हैं। नामिक जाने के लिए जिले के बिर्थी से 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। 27 में से 18 किमी खड़ी चढ़ाई और नौ किमी की तीखी ढलान है। 
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बिर्थी से दूरी अधिक होने के कारण नामिक के लोग अधिकतर बागेश्वर जिले के गोगिना से आवागमन करते हैं। गोगिना से नामिक की दूरी सात किमी है लेकिन यह मार्ग भी खड़ी चढ़ाई वाला है। नामिक में अब तक कोई प्रत्याशी तक वोट मांगने नहीं पहुंचा। जीतने के बाद किसी सांसद के दीदार गांव के लोगों ने नहीं किए।

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2014 में नामिकवासियों ने देखा मुख्यमंत्री

2014 में नामिक के लोगों ने मुख्यमंत्री को देखा। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक हरीश धामी के साथ हेलीकॉप्टर से नामिक पहुंचे थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नामिक के लिए होकरा के पास से 17 किमी सड़क मंजूर हुई। राज्य बनने के बाद डीडीहाट के विधायक विशन सिंह चुफाल ने नामिक का दौरा किया था। 

मतदान को लेकर संशय में नामिक के लोग
वर्ष 2007-08 में गोगिना (बागेश्वर) के पास रामगंगा नदी में 1.67 करोड़ की लागत से बना झूलापुल 2018 की बरसात में खतरे की जद में आ गया था। अगस्त, सितंबर में हुई तेज बारिश से पुल की नींव से पत्थर निकल गए हैं, नींव खोखली हो गई है। ग्राम प्रधान तुलसी जैम्याल कहती हैं कि पुल की मरम्मत का मामला लगातार प्रशासन और विभाग के सामने उठाया जा रहा है लेकिन पुल की मरम्मत नहीं की गई।

कहती हैं कि पुल गिरा तो गांव के लोगों के पास 27 किमी लंबे बिर्थी मार्ग का ही विकल्प बचेगा। इस समय बिर्थी वाले मार्ग पर 4 से 6 फीट बर्फ जमा है। उनका कहना है कि गांव के लोग इस मुद्दे पर लोकसभा चुनाव में मतदान करने, न करने पर विचार कर रहे हैं। 2012 में सड़क, स्वास्थ्य, संचार आदि मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था।

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