फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   lok sabha election tehri seat

टिहरी सीट पर दो सियासी घरानों में घमासान

Sun, 13 Apr 2014 01:58 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 13 Apr 2014 01:58 PM IST
विज्ञापन
lok sabha election tehri seat

टिहरी संसदीय सीट पर मुकाबला दो राजनीतिक घरानों का है। एक तरफ टिहरी राजघराने की साख तो दूसरी तरफ हेमवती नंदन बहुगुणा परिवार की तीसरी पीढ़ी का भविष्य दांव पर है।

विज्ञापन


इस चुनाव पर भी टिका साकेत का भविष्य
यहां राजघराने की माला राज्यलक्ष्मी शाह (भाजपा) की टक्कर पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा (कांग्रेस) से है। उपचुनाव में मिली हार की कसक झेल रहे साकेत का भविष्य इस चुनाव पर भी टिका है।
विज्ञापन


साकेत के सामने खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की चुनौती है। 2012 के उपचुनाव में साकेत को मात दे चुकीं माला राज्यलक्ष्मी के लिए भी इस बार स्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। उन्हें टिकट देने से भाजपा का एक वर्ग नाराज भी हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन 2012 में मोदी फैक्टर भी नहीं था। भाजपा-कांग्रेस के अलावा टिहरी से आम आदमी पार्टी, बसपा और उक्रांद के भी उम्मीदवार ताल ठोंक रहे हैं। सियासी विरासत के मामले में दोनों परिवार एक-दूसरे से कम नहीं हैं।

10 मर्तबा जनता ने राजपरिवार पर भरोसा जताया
टिहरी में शाही परिवार की पैठ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक 16 लोकसभा चुनावों (उपचुनाव समेत) में 10 मर्तबा जनता ने राजपरिवार पर भरोसा जताया है।

उधर, बहुगुणा परिवार यूपी से दिल्ली तक दबदबा रखने वाले हेमवती नंदन की मजबूत सियासी नींव पर खड़ा है। बहुगुणा परिवार की टिहरी राजघराने से सियासी जंग पुरानी है।

विजय बहुगुणा खुद 1999 और 2004 में मानवेंद्र शाह से मात खाने के बाद पहली बार 2007 में टिहरी उपचुनाव जीते थे। साकेत के लिए चुनौती अब की बार और बड़ी है। साकेत ने 2012 में अपने पिता की ही सीट गंवाई थी।

ऐसे में इस बार पिता विजय बहुगुणा को ही टिकट देने की जोरदार पैरवी हुई। लेकिन सीनियर बहुगुणा चुनाव लड़ते तो बेटे साकेत के सियासी सफर पर ब्रेक का भी खतरा था। लंबी खींचतान के बाद साकेत के टिकट पर मुहर लगी।

उत्तरकाशी में बहुगुणा के मुख्यमंत्री काल में ही खेला गया ओबीसी कार्ड साकेत को फायदा दे सकता है। उधर, राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी कुंवर जपेंद्र सिंह भी मैदान में हैं। वह टिहरी से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं।

मुन्ना अब तो मान गए...
भाजपा में मुन्ना सिंह चौहान टिहरी से टिकट की दावेदारी जताते रहे। लेकिन पार्टी ने मौजूदा सांसद राज्यलक्ष्मी पर ही भरोसा जताया। ऐसे में मुन्ना नाराज हुए। तेवर भी दिखाए। हालांकि पार्टी का दावा है कि अब वे मान चुके हैं।

प्रचार में लग गए हैं। लेकिन अंदर ही अंदर अगर मुन्ना असंतुष्ट रहे तो इसका असर चकराता और पास की दो विधानसभा क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

जीत-हार तय करता है मैदानी क्षेत्र
टिहरी लोकसभा क्षेत्र में उत्तरकाशी जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों में महज पौने दो लाख वोटर हैं। टिहरी जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में लगभग तीन लाख मतदाता हैं।


शेष साढ़े सात लाख मतदाता देहरादून जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों के हैं। 2012 के उपचुनाव में भाजपा को देहरादून के मैदानी क्षेत्रों की पांच विधानसभा सीटों पर भारी बढ़त मिली थी। कांग्रेस के लिए मैदानी क्षेत्र बड़ी चुनौती है।

उक्रांद के नाम पर तीन प्रत्याशी
उक्रांद-ऐरी : जयप्रकाश उपाध्याय
उक्रांद यूनाइटेड : राणा रणवीर सिंह,
उक्रांद पंवार धड़ा : सोहन पाल सिंह पंवार
विशेषता : पुराना क्षेत्रीय दल होने की पहचान
कमजोर : खेमेबाजी से दल का गिरता जनाधार

टिहरी संसदीय सीट
कुल मतदाता : 12,76,58
14 विधानसभा क्षेत्र, भाजपा और कांग्रेस की 6-6 सीटें
एक विधायक निर्दलीय और एक उक्रांद का

कांग्रेस : साकेत बहुगुणा

विशेषता : पीछे समृद्ध राजनीतिक विरासत। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे हैं।
कमजोरी : उपचुनाव में मिली हार और पुनर्निर्माण कार्य में देरी।

भाजपा : माला राज्यलक्ष्मी शाह
विशेषता : राजघराने की बहू होने का फायदा। साकेत को हरा चुकी हैं उपचुनाव में।
कमजोरी : क्षेत्र में कम सक्रियता और मुन्ना सिंह चौहान का असंतोष।

आप : अनूप नौटियाल
विशेषता : सामाजिक कार्यों में रहे सक्रिय। 108 सेवा के चलते है क्षेत्र में पहचान।
कमजोरी : चुनाव का अनुभव नहीं है, आप का क्षेत्र में कमजोर संगठनात्मक ढांचा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed