लोकसभा चुनाव 2019 : उत्तराखंड में अमित शाह ने संगठन के नेताओं को दी तरजीह
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उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीट पर प्रत्याशी चयन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन को तरजीह दी है। पांचों सीटों पर जो चेहरे उतारे गए, उनमें से चार संघ की पाठशाला से निकलकर सांगठनिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रहे हैं। पार्टी ने अपने बुजुर्ग सांसदों बीसी खंडूड़ी और भगत सिंह कोश्यारी का टिकट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतारा है।
जब तक पार्टी ने टिकट तय नहीं किए थे, तब तक पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा और नैनीताल लोकसभा सीट पर उन नेताओं के नाम भी दावेदारों के रूप में प्रमुखता से सामने आ रहे थे, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।
कर्नल अजय कोठियाल और एडमिरल ओपी राणा के नामों का भी भरपूर जोर रहा
पौड़ी लोकसभा सीट पर उम्रदराज बीसी खंडूड़ी के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज होने की वजह से इस सीट पर कैबिनेट मंत्री व पूर्व सांसद सतपाल महाराज, पूर्व में कांग्रेस से इस सीट पर चुनाव हार चुके डॉ. हरक सिंह रावत और महाराज की पत्नी पूर्व कैबिनेट मंत्री अमृता रावत के नामों चर्चाओं रही।
सैन्य बहुल मतदाताओं वाली इस सीट पर संगठन से बाहर के दावेदार कर्नल अजय कोठियाल और एडमिरल ओपी राणा के नामों का भी भरपूर जोर रहा। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने सांसद मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के बेहद करीबी तीरथ सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में तीरथ का चौबट्टाखाल सीट से टिकट काटकर महाराज को उतारा था। तब से तीरथ राष्ट्रीय संगठन की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे।
अजय भट्ट आखिरी समय तक खुद की दावेदारी से इंकार करते रहे
उधर, नैनीताल सीट पर सांसद भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लड़ने को लेकर बार बार दिए जा रहे बयानों के बीच कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य समेत भाजपा के विधायक व अन्य नेता सक्रिय हो गए।
हालांकि चर्चाएं प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के नाम की भी रही। लेकिन कोश्यारी के चलते अजय भट्ट आखिरी समय तक खुद की दावेदारी से इंकार करते रहे। लेकिन अंदरखाने पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने को कह दिया गया था। इसी रणनीति के तहत उनकी ओर से मंगलवार को नामांकन पत्र लिया गया।
हरिद्वार सीट पर सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक पर दांव
टिहरी लोकसभा सीट पर विजय बहुगुणा, पार्टी विधायक मुन्ना सिंह चौहान, गणेश जोशी समेत कई अन्य नेताओं की दावेदारी सामने आ रही थी। लेकिन पार्टी ने राजपरिवार की सांसद माला राज्य लक्ष्मी को ही मैदान में उतारने का ही निर्णय लिया। इस तरह पार्टी अपने पुराने और संगठन से जुड़े नेताओं को ही प्राथमिकता दी।