फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   lockout in cooperative organization.

उत्तराखंड में सहकारी संस्थाओं में 20 से तालाबंदी

Fri, 05 Feb 2016 08:55 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 05 Feb 2016 08:55 AM IST
विज्ञापन
lockout in cooperative organization.

आठ लाख परिवारों से सीधे वास्ता रखने वाले कांग्रेस के सहकारिता परिवार ने चुनावी वर्ष में उत्तराखंड सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी।

विज्ञापन


देहरादून में स्थित निबंधक संपर्क कार्यालय को अल्मोड़ा शिफ्ट करने के विरोध में 20 फरवरी से प्रदेश की सभी सहकारी संस्थाओं में तालाबंदी रहेगी। इस आंदोलन की भूमिका पिछले चार साल से बन रही थी। प्रदेश में दस जिला सहकारी बैंकों में से छह गढ़वाल में हैं। कुल 3100 सहकारी संस्थाओं में से 2100 संस्थाएं भी गढ़वाल में ही हैं।

उधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ की संस्थाओं को भी अल्मोड़ा की बजाय दून नजदीक पड़ता है। इसके बावजूद सरकार ने हाल ही में निबंधक संपर्क कार्यालय दून से हटाकर अल्मोड़ा शिफ्ट कर दिया। यही हाल राज्य सहकारी आवास संघ, स्टेट वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के स्टेट ऑफिस और हथकरघा संघ का भी हुआ। एकीकृत सहकारी विकास परियोजना इस समय चमोली और हरिद्वार में शुरू हो रही है। इनके अनुश्रवण कार्यालय दून से हटाकर अल्मोड़ा शिफ्ट कर दिए गए।
विज्ञापन


बैंक चेयरमैनों की माने तो इसकी जड़ में मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री का कुमाऊं प्रेम है। इनका आरोप है कि सहकारिता मंत्री यशपाल आर्य सहकारी संस्थाओं पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है। आर्य के बेटे संजीव आर्य राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी हैं। आर्य का निर्वाचन क्षेत्र बाजपुर है। ऐसे में बिना किसी मांग और बिना किसी को विश्वास में लिए इन संस्थाओं के मुख्यालयों को कुमाऊं शिफ्ट किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सहकारी संस्थाओं की नाराजगी की वजह पिछले चार साल से चली आ रही उपेक्षा भी है। वित्तीय सहकारी संस्थाएं स्वायत्तता की मांग कर रही है। वैद्यनाथन कमेटी की संस्तुति भी यही कह रही है। पिछले चार साल में इसके लिए बनी एक्ट कमेटी की सिर्फ एक बार बैठक हुई है। कांग्रेस ने 2012 के घोषणा पत्र में वैद्यनाथन कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री हरीश रावत यह स्वीकार करते भी रहे। पर, हुआ कुछ भी नहीं।

खुद हरीश रावत थे कमेटी में
यूपीए सरकार के कार्यकाल में लोक सभा की जिस स्थायी समिति ने वैद्यनाथन कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने की पैरवी की थी, उस समिति में बतौर केंद्रीय मंत्री हरीश रावत भी शामिल थे। एनडी तिवारी की सरकार ने नवंबर, 2006 में इसके लिए एमओयू भी साइन किया था। इसके बाद 2013 में केंद्रीय सहकारिता अधिनियम लागू हुआ, पर प्रदेश में सहकारी संस्थाओं को स्वायत्तता देने का मामला अटका रहा।

तालाबंदी से कौन होंगे परेशान

तालाबंदी से सहकारी बैंकों और प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों के सदस्य किसान परेशान होंगे। इन किसानों को बैंकों से फसल बीमा, कृषि ऋण, कृषि उपकरणों पर ऋण आदि मिलता है। पैक्स के सदस्य किसान खाद, बीज, कीटनाशक आदि लेते हैं। उपभोक्ता समितियों के सदस्य भी सहकारिता से जुड़े हुए हैं तो कई उपभोक्ता जिला सहकारी बैंकों पर बचत, आवास, उपभोक्ता ऋण आदि के लिए निर्भर है।

काम नहीं आया डैमेज कंट्रोल
सहकारी बैंकों के अध्यक्षों की नाराजगी की खबर लगने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को कुमाऊं और गढ़वाल में एक-एक उप निबंधक कार्यालय स्थापित करने का आदेश दिया था। लेकिन बृहस्पतिवार को यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री की यह कोशिश बेकार साबित हुई है। सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों का कहना है कि निबंधक कार्यालय वापस देहरादून लाना ही समस्या का समाधान है।

कांग्रेस से जुड़े हैं सहकारी प्रतिनिधि

किसान कांग्रेस- प्रमोद कुमार सिंह
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष- अब्दुल रज्जाक
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री- डा. केएस राणा
कांग्रेस सहकारिता प्रकोष्ट अध्यक्ष- राजेंद्र नेगी
कांग्रेस प्रदेश सचिव- सुशील राठी

मुख्यमंत्री हर जगह स्वायत्तता की बात करते रहते हैं। हाल यह है कि इसके बाद भी प्रदेश में सहकारी संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण और अधिक कसा जा रहा है। सहकारी संस्थाओं को खत्म किया जा रहा है। सहकारी संस्थाएं सिर्फ घोड़ा-गाड़ी के लिए नहीं हैं। एक के बाद संस्थाओं को कुमाऊं शिफ्ट किया जा रहा है।
- प्रमोद कुमार सिंह, अध्यक्ष, राज्य सहकारी संघ

20 फरवरी से तालाबंदी का ऐलान
बृहस्पतिवार को दून में हुई जिला सहकारी बैंकों के चेयरमैनों और अन्य सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की बैठक में 20 फरवरी से सहकारी संस्थाओं में तालाबंदी का ऐलान किया गया। बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब प्रेस वार्ता में बैंक चेयरमैनों ने सहकारिता मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत तक की मंशा पर सवाल उठाए।

जिला सहकारी बैंक चेयरमैन संगठन के अध्यक्ष केएस राणा ने कहा कि निबंधक संपर्क कार्यालय को दून से अल्मोड़ा बिना किसी मांग के शिफ्ट किया गया। सारा मामला सहकारी संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण को बनाये रखने का है।


संस्थाएं चार साल से स्वायत्तता की मांग कर रही हैं। हर बार आश्वासन ही मिलता है। बैंक चेयरमैनों के मुताबिक यह सब मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री की शह पर भी हो रहा है। बैठक में टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, चमोली, हरिद्वार सहित अन्य जिला सहकारी बैंक और अन्य सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed