Lockdown 4.0: दोबारा ट्रेन चलने की कवायत से बढ़ी राजाजी प्रशासन टेंशन, हाथियों की सुरक्षा को बना रहे प्लान
- लॉकडाउन के दौरान हाथी करते रहे रेलवे ट्रैक पर स्वच्छंद विचरण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में करीब दो महीने के लॉकडाउन के दौरान रेलों का संचालन भी पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगल से गुजरने वाले ट्रैक पर हाथियों के झुंड मन माफिक विचरण करते रहे। इस लंबे अंतराल में उन्हें स्वच्छंद विचरण की आदत पड़ चुकी है। रेलवे अब दोबारा से ट्रेनों का संचालन शुरू करने जा रहा है।
ऐसे में पार्क प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। वह हाथियों की सुरक्षा के लिए अभी से होमवर्क करने पर जुट गया है। पार्क के अधिकारियों ने रेलवे को पत्र लिखकर दोबारा शुरू होने वाली ट्रेनों का शेड्यूल देने को कहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की तीन रेंजों हरिद्वार, मोतीचूर और कांसरो के 22 किलोमीटर के क्षेत्र में रेलवे लाइन गुजरती है। दो महीने से ट्रेनों का संचालन बिलकुल नहीं हुआ।
केवल कभी कभार पार्सल ट्रेन का ही संचालन हुआ। ट्रैक पर ट्रेन नहीं चलने से हाथियों का मूवमेंट बढ़ गया है। हाथियों के झुंड अक्सर रेलवे ट्रैक के पास घूमते नजर आ रहे हैं। एक जून से रेलवे ने रेल गाड़ियां चलाने की योजना बना ली है। ऐसे में पार्क से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन पर रेल गाड़ियों के संचालन को लेकर पार्क प्रशासन की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। पार्क प्रशासन ने रेलवे से ट्रेनों का शेड्यूल मांगा है। इसी शेड्यूल से ट्रैक पर गश्त बढ़ाई जाएगी। इस दौरान वहां विचरण करने वाले हाथियों के झुंड को जंगल की तरफ खदेड़ा जाएगा।
रेलवे ट्रैक पर कई बार जान गंवा चुके हैं हाथी
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की हरिद्वार, मोतीचूर और कांसरो रेंज से होकर गुजरने वाले रेलवे ट्रैक पर रेलगाड़ी की चपेट में आकर कई बार हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ समय पूर्व ही ज्वालापुर गुरुकुल महाविद्यालय के पास रेलगाड़ी की चपेट में आकर दो हाथियों की मौत हो गई थी। इसी के साथ मोतीचूर और कांसरों रेंज में भी रेलवे ट्रैक पर रेलगाड़ी की चपेट में आकर कई बार हाथी अपनी जान गंवा चुके हैं।
लॉकडाउन के दौरान देखने को मिला कि हाथियों के झुंड रेलवे ट्रैक पर पहले की अपेक्षा ज्यादा मूवमेंट कर रहे हैं। अब वह बिना किसी बाधा के ट्रैक को आर-पार करने के अभ्यस्त हो गए। इसलिए दोबारा ट्रेन चलने पर उनकी जान का खतरा हो सकता है। हाथियों की सुरक्षा के लिए रेवले को पत्र लिखकर ट्रेनों का शेड्यूल मांगा गया है। इसी शेड्यूल के हिसाब से ट्रैक पर गश्त बढ़ाएंगे और हाथियों को बचाया जाएगा।
- कोमल सिंह, वन्यजीव प्रतिपालक राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क।