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नदी किनारे रहने वाले वाले नहीं बनेंगे जमीन के मालिक

Fri, 25 Nov 2016 10:41 AM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 25 Nov 2016 10:41 AM IST
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Living along the river bank will not be the owner of the land
- फोटो : demo pic

मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने के लिए सरकार ने नियमावली को मंजूरी दे दी है।

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नियमावली के अनुसार केवल उन्हीं मलिन बस्तियों के लोगों को जमीन पर मालिकाना हक मिलेगा, जो नदी तट से दूर होंगे। नदी किनारे रहने वाले लोगों को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम में शामिल किया जाएगा। हालांकि नदी से कितनी दूरी तक रहने वाले लोगों को इसका लाभ मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है।

उत्तराखंड राज्य नगर निकायों में अवस्थित मलिन बस्तियों के सुधार, विनियमितीकरण, पुनर्वासन, पुनर्व्यस्थापन और उससे संबंधित व्यवस्थाओं एवं अतिक्रमण निषेध नियमावली 2016 के अनुसार मलिन बस्तियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें श्रेणी एक और दो में रहने वाले लोगों को तो मालिकाना हक दिया जाएगा, लेकिन श्रेणी तीन वाले शामिल नहीं होंगे।
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श्रेणी तीन में दस अलग-अलग भौगोलिक परिस्थिति वाले क्षेत्र शामिल हैं। नदी किनारे रहने वाले लोग भी इसी श्रेणी में शामिल हैं। खास बात यह है कि राजधानी समेत प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में मलिन बस्तियां नदियों के किनारे ही बसी हैं।
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ऐसे में वहां रहने वालों को मालिकाना हक देने के बजाय सरकार रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम के तहत पुनर्वासित करेगी। इससे मालिकाना हक की चाह रखने वाले कई लोगों की उम्मीदों को झटका लग सकता है। 

बिना कीमत चुकाए नहीं बनेंगे मालिक
मालिकाना हक पाने के लिए मलिन बस्ती के लोगों को जमीन की कीमत देनी होगी। आवासीय मामलों में अधिकतम 50 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बने भवन के लिए नौ नवंबर 2000 के सर्किल रेट की 20 फीसदी और 50 से 100 वर्ग मी क्षेत्रफल में नौ नवंबर 2000 के सर्किल रेट के बराबर धनराशि देनी होगी।

वहीं 100 से 250 क्षेत्रफल में मौजूदा सर्किल रेट का 50 फीसदी भुगतान करना होगा। इससे अधिक क्षेत्रफल वाले मामलों को फिलहाल शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं व्यावसायिक मामलों में 10 वर्ग मी. तक के निर्माण में नौ नवंबर 2000 के सर्किल रेट और 10 से 100 वर्ग मी तक के निर्माण में सर्किल रेट के दोगुने पर कंपाउंडिंग होगी। 100 वर्ग मी से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण में मौजूदा सर्किल रेट के आधार पर भुगतान करना होगा।


योजना के लिए सर्वे का काम चल रहा है। फिलहाल 31 दिसंबर तक योजना का सर्वे होगा। नदी तट या बिल्कुल सटे क्षेत्रों के लोगों को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट स्कीम में शामिल किया जाएगा। 
- राजकुमार, अध्यक्ष, मलिन बस्ती नियमितीकरण व सुधार समिति

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