रेलवे क्रॉसिंग पार करते समय गिरा सातवीं का छात्र, ट्रेन गर्दन पर गुजरने से हुई दर्दनाक मौत
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देहरादून में मोहकमपुर फाटक पर रेलवे पटरी पार करने की हड़बड़ाहट में गिरे सातवीं कक्षा के छात्र की गर्दन ट्रेन के नीचे आ गई। हादसा इतना भयानक था कि मौके पर मौजूद अन्य स्कूली बच्चाें को चीत्कार से पूरा इलाका दहल गया।
छात्र की मौत सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। इलाके के लोगों का आरोप है कि पटरी के दोनों तरफ सुरक्षा के इंतजाम न होने के कारण रोजाना यहां से गुजरने वाले स्कूली बच्चों की जिंदगी खतरे में रहती है।
नेहरू कालोनी के नत्थनपुर निवासी आशीष का बड़ा बेटा अनुभव मोहकमपुर फाटक के पास रेलवे लाइन से लगे केंद्रीय विद्यालय में कक्षा सात का छात्र था। अनुभव सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे स्कूल की छुट्टी के बाद अपने साथियों के साथ रेलवे लाइन को पार कर रहा था।
एक बार तो अनुभव ने पटरी को पार कर लिया था। इसी बीच अचानक अनुभव वापस पटरी की तरफ लौटा और लड़खड़ाकर गिर गया। इससे पहले कि वह संभल पाता हरिद्वार से आ रही राप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेन उसके ऊपर से गुजर गई।
हादसे में अनुभव की गर्दन और एक पैर शरीर से अलग हो गया। अनुभव का खून से लथपथ शव देखकर साथी छात्र बुरी तरह घबरा गए। छात्रों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। नेहरू कालोनी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचायतनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बड़ा बेटा था अनुभव
दुर्घटना का शिकार हुआ अनुभव अपने परिवार का बड़ा बेटा था। उससे छोटे तीन भाई और एक बहन बताई गई है। पिता आशीष प्राइवेट वाहन चलाते हैं। बेटे की मौत से मां और पिता का रोते-रोते बुरा हाल है।
बेतरतीब बना है फुट ओवरब्रिज
रेलवे विभाग ने पटरी पार करने को फुट ओवर ब्रिज बना रखा है। सीढ़ियों के बजाय ओवरब्रिज पर रैंप बने हैं, जिस पर चढ़ना आसान नहीं है। स्कूली बच्चों के अलावा आसपास के गांवाें के लोग भी फुट ओवरब्रिज का इस्तेमाल करने के बजाय पटरी को पार कर निकलते हैं। लोगों का कहना है कि फुट ओवरब्रिज बेतरतीब होने के कारण बेहद कम लोग ही इसका इस्तेमाल करते हैं।
नहीं हैं सुरक्षा के इंतजाम
केवि के छात्र अनुभव की मौत से इलाके के लोग बेहद आक्रोशित हैं। अधिवक्ता स्वराज रावत का कहना है कि दुर्घटना रोकने को पटरी के दोनों तरफ रेलिंग नहीं है। ओवरब्रिज बनने के बाद यहां से फाटक हटा दिया गया। इस कारण ट्रेन के आने का पता ही नहीं चलता। कुछ समय पहले यहां आए केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के सामने लोगों ने यह मुद्दा उठाया था। निशंक ने सुरक्षा की दृष्टि से यहां अंडर पास बनाने का भरोसा दिया था, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।