गुलदार पर भारी पड़े 70 साल के वृद्घ, बचाई सात जिंदगी
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उत्तराखंड के कर्णप्रयाग के एक गांव में 70 साल के वृद्घ गुलदार पर भारी पड़ गए। इतना ही नहीं उन्होंने अकेले गुलदार को कैद कर दिया।
गनोली गांव के 70 वर्षीय भजन सिंह ने अपनी बहादुरी से सात जिंदगियों को बचा लिया। गुलदार ने जब गर्दन पर झपट्टा मारकर घायल किया तो उन्होंने साहस दिखाते हुए गुलदार को लात मारकर सीढ़ियों से नीचे गिरा दिया। नीचे भी कमरा था, भजन सिंह ने तत्परता के साथ गुलदार को लट्ठ के सहारे उस कमरे में बंद कर दिया।
गुरुवार तड़के तीन बजे गुलदार उनके मकान में घुसा था, उस समय दरवाजे की चटखनी नहीं लगी थी। तड़के तीन बजे घर में घुसे गुलदार को रात आठ बजकर 40 मिनट पर पिंजरे में कैद किया जा सका।
इसके बाद उन्होंने दूसरे कमरे में सो रही पत्नी महेशी देवी, पुत्री मुन्नी और ऊषा सहित चार नाती-नातिनों को छत के दरवाजे के रास्ते बाहर किया। इतनी देर में बंद दरवाजे को तोड़ गुलदार उनके पीछे छत की ओर भागा। भजन सिंह ने छत का दरवाजा भी बंद कर दिया।
पूरे परिवार को सकुशल बाहर निकालने के बाद वे बेहोश हो गए। घायल भजन सिंह को 108 सचल चिकित्सा वाहन की मदद से जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुंचाया गया। उनकी छोटी बेटी ऊषा ने बताया कि गुलदार घर की सीढ़ियों पर सो रहे कुत्ते की ढूंढ में अंदर घुसा था।
फौरी राहत के तौर पर दिए पांच हजार रुपए
सुबह 11 बजे वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए कमरे के बाहर पिंजरा लगाया लेकिन कई घंटे बाद भी गुलदार पिंजरे में कैद नहीं हो पाया।
हालांकि दोपहर साढ़े बारह बजे गुलदार पिंजरे में पहुंचा था लेकिन उसका लॉक बंद नहीं हो पाया और वह फिर कमरे में घुस गया। रात घायल भजन सिंह को फौरी राहत के तौर पर पांच हजार रुपए आर्थिक सहायता दी गई है।
जब गुलदार से भिड़ना ही पड़ जाए...
- गुलदार को कभी भी गला पकड़ने का अवसर ना दे। उसके जबडे़ में गला आ जाने के बाद वो व्यक्ति तो क्या भारी-भरकम जानवर को भी नहीं छोड़ता।
- गुलदार घेर ले तो हिम्मत न छोड़ें, हथियार अथवा लाठी पास ना होने की सूरत में झाड़ी अथवा पत्थर से उस पर हमला करें।
- अपने पैरों अथवा हाथों के इस्तेमाल से उसको दूर रखें।
- सहायता के लिए जोर-जोर से चिल्लाएं, लोगों को आते देख वह शिकार को छोड़ भाग जाता है
- पीठ करके भागें नहीं डटकर मुकाबला करें। ऐसा करने पर वो डर कर भाग जाएगा।
- अकेले जंगल में ना जाएं, गुलदार दो अथवा अधिक लोगों पर वह कभी हमला नहीं करता।
- घायल होने की सूरत में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और रेबीज़ का इंजेक्शन लगाएं।
(कई आदमखोरों को ढेर करने वाले मशहूर शिकारी कुंवर सिंह के मुताबिक)