सरकारी-प्राईवेट स्कूलों में एक समान पाठ्यक्रम होगा लागू, देनी होगी केवल फीस
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पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के बाद अब भाजपा सरकार ने भी निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए कानून बनाने का दावा किया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का कहना है कि कानून आने के बाद कक्षा पांच तक के बच्चों से स्कूल हर महीने 1250 से अधिक फीस नहीं ले सकेंगे।
सरकारी-गैर सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी और एससीआरटी की ओर से निर्धारित एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा सुधार की कीमत पर यदि वह अपना अगला विधानसभा चुनाव हार भी जाते हैं तो वह इसके लिए तैयार हैं। लेकिन सरकार किसी भी मामले में बैकफुट पर नहीं आएगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पब्लिक स्कूलों को इस सत्र तक की छूट दी गई है। अगले सत्र से इनकी मनमानी नहीं चलेगी। बहुत जल्द वह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलकर स्कूलों की मनमानी पर रोक के लिए कानून लाने जा रहे हैं।
इससे निजी स्कूल मनमाने तरीके से हर साल फीस में वृद्धि नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा पांच साल से पहले पाठ्यक्रम में बदलाव भी नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अब तक देखने में आ रहा है कि हर साल पाठ्यक्रम में बदलाव कर अभिभावकों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
अभिभावकों को चिह्नित दुकानों से महंगी किताबें लाने का दबाव बनाया जाता है।अगले सत्र से सरकारी और निजी स्कूलों को एससीईआरटी की ओर से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। मामले में सीबीएसई के अधिकारियों की भी बैठक बुलाई गई है। मंत्री ने कहा कि कानून बनने के बाद कक्षा आठवीं से नवीं तक के बच्चों से स्कूल 25 हजार और नवीं से बारहवीं तक अधिकतम वार्षिक फीस 30 हजार से अधिक नहीं ले सकेंगे।
निजी स्कूलों में अलग-अलग बोर्ड की मान्यता के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि जो मनमानी करेंगे और एससीईआरटी की पुस्तकें नहीं चलाएंगे वे स्कूल बंद कर सकते हैं।