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मुजफ्फरनगर कांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाएंगे वकील, केस ट्रांसफर करने को देंगे पुनर्विचार याचिका

Fri, 07 Dec 2018 08:41 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 07 Dec 2018 08:41 AM IST
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Lawyers will file Reconsideration petition in Supreme court for muzaffarnagar firing case
supreme court - फोटो : PTI

राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर अधिवक्ता मुजफ्फरनगर कांड से जुड़े सभी मामले उत्तराखंड हाईकोर्ट ट्रांसफर करने की मांग करेंगे। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर इसकी जानकारी दी। 

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अधिवक्ताओं ने कहा कि नितीश कटारा और निर्भयाकांड जैसे कई केसों को वादी की सुविधा और गवाहों की सुरक्षा देखते हुए पूर्व में स्थानांतरित किया जा चुका है। मुजफ्फरनगर कांड तो निर्भया कांड से भी ज्यादा वीभत्स है। ऐसे में मुकदमा दूसरे प्रदेश से उत्तराखंड ट्रांसफर किया जाना उचित होगा। राज्य आंदोलनकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमन साह ने कहा कि 19 दिसंबर को संघ की प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई गई है।
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बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में राज्य आंदोलनकारी मंच, राज्य आंदोलनकारी सेनानी मोर्चा कोटद्वार, प्रदेश की सभी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व महासचिव, हाईकोर्ट बार के पदाधिकारी, बार काउंसिल उत्तराखंड के नव निर्वाचित सदस्यों व सभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बुलाया गया है।
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बैठक में राज्य आंदोलनकारियों को न्यायिक, सामाजिक, राजनीतिक न्याय दिलाने की प्रक्रिया के लिए निर्णय लिया जाएगा। रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर कांड, खटीमा और मंसूरी गोली कांड के आरोपियों को लंबा समय बीतने के बाद भी न्याय नहीं मिल सका है।

चश्मदीद गवाह की ट्रेन से फेंक कर की जा चुकी है हत्या

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमन साह ने कहा कि लंबा समय बीतने के कारण गवाहों को प्रभावित किया जा रहा है। सुभाष गिरी नाम के एक चश्मदीद गवाह की ट्रेन से फेंककर हत्या की जा चुकी है। अब हमने अपनी बहनों को न्याय दिलाने के लिए यह लड़ाई छेड़ी है।  

राज्य सरकार दायित्व निभाने में फेल रही

संघ के महासचिव एडवोकेट एमसी पंत ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार अपना दायित्व निभाने में फेल रही है। हाईकोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की जगह सरकार ने ज्यूरीडिक्शन उत्तर प्रदेश बताकर अपना पलड़ा झाड़ लिया। 

अधिवक्ता सुरक्षा बिल लाने की भी मांग

अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य के अस्तित्व को बचाने और यहां के निवासियों के हितों के संरक्षण व पर्यावरणीय अनुकूल विकास के लिए भू अध्यादेश बनाने, अधिवक्ता सुरक्षा बिल लाने के लिए सरकार व लॉ कमीशन को प्रस्ताव भेजने, अधिवक्ताओं को 5 वर्षों तक प्रतिमाह 15000 रुपये मानदेय देने और इसके लिए आवश्यक फंड जुटाने, अधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आकस्मिक दुर्घटना के समय निश्चित धनराशि देने का प्रस्ताव भी इस बैठक में लाया जाएगा।

इस दौरान पूर्व सांसद अधिवक्ता डा. महेंद्र सिंह पाल, त्रिभुवन फर्त्याल, भुवनेश जोशी, वीएस नेगी, दुर्गा सिंह मेहता, योगेश पचौलिया, नंदन सिंह कन्याल, किशोर कुमार, वीरेंद्र अधिकारी, प्रभाकर जोशी, डा. दीप जोशी, रविन्द्र सिंह बिष्ट, भूपेंद्र बिष्ट, हेम लोहनी, विशाल मेहरा, एमपी शाह, राकेश नेगी, डीएस नेगी, सुंदर भंडारी, मनोज टिंटगई, एनके पपने आदि मौजूद रहे।

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